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Nalnda स्वयं सहायता समूहों को बैंक से नहीं मिल रहा सहयोग
 

Nalnda स्वयं सहायता समूहों को बैंक से नहीं मिल रहा सहयोग


बिहार न्यूज़ डेस्क  सरकार द्वारा चलाए जा रहे आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम की शुरुआत की गई थी. इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूह बनाकर रोजगार के अवसर बढ़ाना था. ताकि भारत में गरीबी स्तर को कम किया जा सके. महिलाएं आत्मनिर्भर बने. इसके तहत स्वयं सहायता समूह को बैंक द्वारा लोन दिया जाता है. बैंक से मिलने वाले लोन के मध्यम से महिलाएं स्वरोजगर करती हैं. एसएचजी के तहत इस वित्तीय वर्ष में 37 आवेदक ऋण के इंतजार में हैं. वहीं व्यक्तिगत लोन के लिए 45 आवेदकों का आवेदन बैंकों में लंबित पड़ा हुआ है. लेकिन, बैंक अधिकारियों के मनमानी और असहयोग पूर्ण रवैया के कारण स्वरोजगार का सपना संजोए महिलाओं का मनोबल टूटने लगा है. स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बैंकों के चक्कर काटते-काटते थक गई हैं. सभी बैंकों का यही हाल है. समूह की महिलाओं का कहना है कि बैंक के अधिकारियों द्वारा उन्हें स्पष्ट उत्तर नही दिया जाता है.

एसएचजी के 136 में से सिर्फ 54 का ही हुआ निष्पादन सेल्फ हेल्प ग्रुप के तहत वित्तीय वर्ष 2021-2022 एंव 2022-2023 में नगर निगम की तरफ से विभिन्न बैंकों को 136 आवेदन ऋण के लिए भेजे गए थे. जिसमें सिर्फ 54 आवेदकों को ही ऋण प्राप्त हुआ है. अभी भी 82 आवेदक ऋण के इंतजार में हैं. इस वित्तीय वर्ष में अभी तक 41 आवेदन भेजे गए. चार आवेदनों का निष्पादन बैंक द्वारा किया गया है.
व्यक्तिगत आवेदकों को भी नहीं मिल रहा लोन शहरी गरीब व्यक्ति को भी इस आजीविका मिशन के तहत स्वरोगजार करने के लिए बैंको द्वारा लोन दिया जाता है. वित्तीय वर्ष 2021-2022 में व्यक्तिगत लोन के लिए 30 आवेदन विभिन्न बैंको को भेजे गए थे. जिसमें एक भी आवेदक को ऋण प्राप्त नहीं हुआ. वित्तीय वर्ष 2022-2023 में विभिन्न बैंको को 46 आवेदन भेजा गया था.
जिसमें सिर्फ एक आवेदक को बीओआई से लोन प्राप्त हुआ है. अन्य बैंको द्वार एक भी आवेदक को लोन नहीं दिया गया है.
प्रबंधक की हुई है तैनाती
इस योजना का लाभ दिलाने के लिए नगर निगम में नगर मिशन प्रबंधक की तैनाती भी की गई है. इनके द्वारा लगातार आवेदनों की मॉनिटरिंग भी की जाती है. बावजूद आवेदनों का निपटारा नहीं होने से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का मनोबल टूट रहा है. इस संदर्भ में नगर मिशन प्रबंधक कुसुम कौर का कहना है कि बैंकों द्वारा ऋण नहीं दिए जाने से सरकार द्वारा चलाई जा रही इस योजना की पूर्ति नहीं हो पा रही है.
हमारे स्तर से बैंकों से संपर्क किया जाता है. लेकिन, बैंकों द्वारा सहयोग नहीं मिल रहा है.
कितने मिलते हैं ऋण
राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत दीनदयाल अंत्योदय योजना की शुरूआत की गई थी. इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों समेत व्यक्तिगत लोन देने का प्रावधान है. स्वयं सहायता समूह को रोजगार बढ़ाने के लिए पचास हजार से पांच लाख रुपये तक का ऋण दिया जा सकता है. जबकि स्वरोजगार के लिए व्यक्तिगत लोन दो लाख रुपये तक देने का प्रावधान है.
पीएम स्वनिधि योजना में भी स्ट्रीट वेंडरों को नही मिल रहा लोन
पीएम स्वनिधि योजना के तहत स्ट्रीट वेंडरों को दिए जाने वाले ऋण में भी बैंक दिलचस्पी नहीं दिखा रही है. नगर निगम क्षेत्र में चल रहे शहरी आजीविका मिशन के तहत इस योजना में विभिन्न बैंको को दिए गए 1133 आवेदन में से सिर्फ 535 आवेदनों को ही स्वीकृत किया गया है. स्वीकृत 535 आवेदनों में से 369 आवेदक को ऋण दिया गया है. शेष 598 आवेदन को विभिन्न कारणों से लौटा दिया गया है. नगर निगम के सीओ प्रियरंजन कुमार का कहना है कि बैंको द्वारा आवेदन को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है. आवेदक बार-बार बैंक का चक्कर लगाते हैं. लेकिन, बैंक के अधिकारिरयों का कहना है कि आवेदक बैंक आते ही नही हैं. उन्होने ने कहा कि पीएम स्वनिधि योजना के तहत स्ट्रीट वेंडरों को स्वरोजगार करने के लिए पहली बार 10 हजार का लोन दिया जाता है. पहला ऋण चुकता करने के बाद दूसरी बार में वेंडरों को 20 हजार और तीसरी बार 50 हजार रुपए ऋण के तौर पर दिया जाता है.
सभी पात्र आवेदकों को बैंको द्वारा लोन देना है. मेरे संज्ञान में यह मामला आया है. मैं नगर निगम से आवेदकों की सूची मंगाकर अपने स्तर से देखूंगा. सभी पात्र आवेदक को योजना का लाभ दिया जाएगा.
-विभाकर झा,एलडीएम

नालंदा  न्यूज़ डेस्क
 

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