वीडियो में देंखे नागौर में हेड कांस्टेबलों पर लगे अपहरण और वसूली के आरोप जांच में खारिज
नागौर जिले के बालाजी थाना क्षेत्र में दो हेड कांस्टेबलों पर लगे अपहरण और अवैध वसूली के आरोप जांच में निराधार पाए गए हैं। इस मामले में पुलिस जांच के बाद आरोपों को खारिज कर दिया गया है।मामले की जानकारी देते हुए जतिन जैन ने बताया कि परिवादी द्वारा हेड कांस्टेबल अशोक मीणा और रतिराम मीणा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में दोनों पर अपहरण और जबरन वसूली जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे।हालांकि, जांच के दौरान कई अहम तथ्य सामने आए। पुलिस के अनुसार, हेड कांस्टेबल रतिराम मीणा घटना के समय मौके पर मौजूद ही नहीं थे। उनकी लोकेशन किसी अन्य स्थान पर पाई गई, जिससे उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी। इसी आधार पर उन्हें क्लीन चिट दी गई है।
बताया गया कि परिवादी नरपत राम ने 17 अप्रैल 2026 की रात की घटना का जिक्र करते हुए एसपी ऑफिस में शिकायत दी थी। उनके अनुसार, वह मोटरसाइकिल से घर लौट रहे थे, तभी रास्ते में एक इनोवा कार में सवार चार व्यक्तियों ने उन्हें रोका।परिवादी का आरोप था कि उन लोगों ने खुद को डीएसटी बीकानेर और नोखा पुलिस से जुड़ा बताते हुए जबरन उन्हें कार में बैठा लिया। इसके बाद उनके साथ मारपीट की गई और उनके पास मौजूद 25,400 रुपए नकद और मोबाइल फोन छीन लिया गया।
पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पहलुओं से जांच की गई, लेकिन हेड कांस्टेबलों की संलिप्तता के कोई ठोस सबूत नहीं मिले। फिलहाल, मामले में अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शिकायत को गंभीरता से लिया गया था और निष्पक्ष जांच के बाद ही यह निष्कर्ष निकाला गया है। वहीं, पुलिस अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना में शामिल असली आरोपी कौन थे। इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि पुलिस के नाम का इस्तेमाल कर अपराध करने वाले गिरोह सक्रिय हो सकते हैं। ऐसे में आम लोगों को सतर्क रहने और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत सूचना पुलिस को देने की सलाह दी गई है।

