नागौर में मिर्धा परिवार के भीतर जमीन विवाद, फुटेज में जानें समाधि स्थल को लेकर आमने-सामने आए ज्योति और मनीष मिर्धा
राजस्थान के नागौर जिले में सियासी रसूख रखने वाले मिर्धा परिवार में जमीन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। यह मामला अब पारिवारिक दायरे से निकलकर सोशल मीडिया तक पहुंच गया है। जोधपुर के सूंथला इलाके में स्थित ‘मिर्धा फार्म’ में बने समाधि स्थल को लेकर पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा और उनके चचेरे भाई मनीष मिर्धा आमने-सामने आ गए हैं। दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के चलते यह विवाद अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है।
दरअसल, पूरे विवाद का केंद्र मिर्धा फार्म हाउस के भीतर स्थित करीब 150 वर्ग गज का समाधि स्थल है। मनीष मिर्धा पक्ष का दावा है कि यह पैतृक समाधि स्थल परिवार की आस्था और विरासत से जुड़ा हुआ है। उनका आरोप है कि पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा इस बेशकीमती जमीन को बेचना चाहती हैं, लेकिन समाधि स्थल के कारण सौदा अटक रहा है। इसी को लेकर परिवार में तनाव की स्थिति बनी हुई है।
इस मामले में 15 जनवरी की रात मनीष मिर्धा ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा की। पोस्ट में उन्होंने समाधि स्थल को परिवार की पहचान और पूर्वजों की स्मृति से जोड़ते हुए इसे सुरक्षित रखने की बात कही। मनीष मिर्धा की इस पोस्ट के बाद मामला तेजी से तूल पकड़ने लगा और सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।
इसके अगले ही दिन, 16 जनवरी की दोपहर पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा ने भी सोशल मीडिया के जरिए पलटवार किया। उन्होंने मनीष मिर्धा के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे जमीन पर कब्जा करने की साजिश करार दिया। ज्योति मिर्धा ने अपने बयान में कहा कि इस विवाद को बेवजह तूल दिया जा रहा है और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पूरे मामले में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है।
दोनों पक्षों के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद यह विवाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। मिर्धा परिवार का नाम नागौर की राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली रहा है, ऐसे में परिवार के भीतर इस तरह का सार्वजनिक टकराव लोगों के बीच चर्चा में है। स्थानीय लोग और राजनीतिक जानकार इसे केवल जमीन का नहीं, बल्कि पारिवारिक विरासत और अधिकारों से जुड़ा मामला बता रहे हैं।
फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस विवाद को सुलझाने के लिए परिवार के स्तर पर कोई बातचीत हो रही है या नहीं। हालांकि, जिस तरह से आरोप-प्रत्यारोप सार्वजनिक मंच पर आ रहे हैं, उससे मामला और उलझता नजर आ रहा है। अगर यह विवाद आगे बढ़ता है, तो कानूनी रास्ता भी अपनाया जा सकता है।
150 वर्ग गज के समाधि स्थल को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब मिर्धा परिवार के अंदरूनी मतभेदों को उजागर कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मामला आपसी सहमति से सुलझता है या फिर अदालत तक पहुंचता है।

