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Moradabad कोरोना काल के सेल्फ मेडिकेशन ने फेल कर दीं कई एंटीबायोटिक, कोरोना काल में दस करोड़ के पार पहुंचा कारोबार 
 

Moradabad कोरोना काल के सेल्फ मेडिकेशन ने फेल कर दीं कई एंटीबायोटिक, कोरोना काल में दस करोड़ के पार पहुंचा कारोबार 


उत्तरप्रदेश न्यूज़ डेस्क   एंटीबायोटिक दवाओं का अंधाधुंध इस्तेमाल होने और शरीर पर इसके दुष्प्रभावों को लेकर चिकित्सकों में बढ़ी चिंता के बीच ऐसी कई एंटीबायोटिक दवाओं के फेल होने की हकीकत सामने आई है जिनका कोरोना काल में खूब धड़ल्ले से इस्तेमाल किया गया था. चिकित्सकों ने इसके पीछे सेल्फ मेडिकेशन यानि बिना चिकित्सकीय सलाह के लोगों में अपने आप से ही दवा ले लेने की बढ़ती प्रवृत्ति को जिम्मेदार बताया है. साथ ही इसे लेकर बड़े पैमाने पर जागरूकता लाए जाने की जरूरत जाहिर की है. चिकित्सकों ने स्वीकारा कि बड़े पैमाने पर एंटीबायोटिक दवाएं खाने कई दवाओं के अधिकतर मरीजों पर बेअसर साबित होने की बात सामने आई है. चिकित्सकों का कहना है कि एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर होने का दायरा काफी बड़ा होने के मद्देनजर इन दवाओं को पर्चे में लिखने में अब हाथ खींचा जा रहा है लेकिन, काफी संख्या में लोग सेल्फ मेडिकेशन करके ले रहे एंटीबायोटिक, जोकि उनकी सेहत के लिए काफी नुकसानदायक हो रहा है.

एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन कई गुना बढ़ने से कोरोना काल में इनका कारोबार दस करोड़ के पार पहुंच गया. मुरादाबाद में एंटीबायोटिक दवाओं का प्रतिमाह करीब पचास लाख का कारोबार है. दवा विक्रेता शोभित मल्होत्रा ने बताया कि इस समय डेंगू, वायरल बुखार के सीजन के चलते एंटीबायोटिक दवाओं की मांग काफी ज्यादा बढ़ी हुई है. चिकित्सकों की ओर से बड़ी संख्या में मरीजों के पर्चे पर एंटीबायोटिक लिखी जा रही हैं. मौजूदा बीमारी के बीच कोई अन्य संक्रमण रोकने के मकसद से एंटीबायोटिक दवा मरीजों को दी जा रही है.
फायदेमंद बैक्टीरिया की दुश्मन है एंटीबायोटिक
कुछ बैक्टीरिया हमारी सेहत के लिए बहुत अच्छे माने जाते हैं इन्हें प्रोबायोटिक करते हैं. एंटीबायोटिक दवाएं इन्हें निशाना बना देती हैं. इससे शरीर की पाचन, रोग प्रतिरोधक क्षमता और यादाश्त तक बुरी तरह प्रभावित हो सकती है. किन्हीं कारणों से अधिक एंटीबायोटिक ले लेने पर फाइबर यानि रेशेदार चीजों का सेवन बढ़ा देने से इसके दुष्प्रभाव घटाए जा सकते हैं.
डॉ.आरबी सिंह, फिजीशियन
एंटीबायोटिक चॉकलेट नहीं , ओवरडोज खतरनाक
कोरोना काल में एजिथ्रोमाइसिन समेत कुछ एंटीबायोटिक दवाएं एंटी वायरल की और शरीर की सूजन घटाने की भूमिका में भी कारगर होने के चलते अत्यधिक इस्तेमाल में आईं. वास्तव में, एंटीबायोटिक दवा कब तक और कितनी डोज में खानी है यह हर मरीज की स्थिति से तय होता है. यह चॉकलेट नहीं है. एंटीबायोटिक की ओवरडोज खतरनाक हो सकती है. डॉ.आरसी अग्रवाल, फिजीशियन


मुरादाबाद न्यूज़ डेस्क
 

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