Samachar Nama
×

Mathura  2.70 अरब खर्च पर नहीं रुक सका खुले में शौच आंकड़ों में 99 गांवों में बन चुके सामुदायिक शौचालय, 2.25 लाख ग्रामीण घरों में भी शौचालय बनाने का दावा
 

Mathura  2.70 अरब खर्च पर नहीं रुक सका खुले में शौच आंकड़ों में 99 गांवों में बन चुके सामुदायिक शौचालय, 2.25 लाख ग्रामीण घरों में भी शौचालय बनाने का दावा

उत्तरप्रदेश न्यूज़ डेस्क   खुले में शौच की प्रवत्ति पर रोक लगाने के लिए केन्द्र व प्रदेश सरकार द्वारा चलाया जा रहा अभियान जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन तौर पर प्रभावी नहीं हो सका है. कहने को जनपद की 99 प्रतिशत ग्राम पंचायतें सामुदायिक शौचालयों से पोषित की जा चुकी हैं. ग्रामीण घरों में 2.25 लाख निजी शौचालय बनाए जा चुके हैं और 9.5 हजार निजी शौचालय निर्माणाधीन हैं. इनके निर्माण पर 2.70 अरब रुपये खर्च हो चुके हैं. इसके बावजूद खुले में शौच की प्रवत्ति को नहीं रोका जा सका है. हालत, ये है कि सामुदायिक शौचालयों का संचालन नहीं हो पा रहा, जबकि निजी शौचालयों में कंडे व भूसा भरा जा रहा है.

जिला पंचायत राज विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनपद में 504 ग्राम पंचायतों में से 496 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय बन चुके हैं. इनमें करीब आधा दर्जन सामुदायिक शौचालयों में निर्माण कार्य शेष है. 496 ग्राम पंचायतों में बनाए गए सामुदायिक शौचालयों के रख-रखाव एवं स्वच्छता की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के हवाले की गई है. कोई भी ग्रामीण सुबह पांच से 10 बजे तक एवं शाम को पांच से आठ बजे तक इन सामुदायिक शौचालयों का प्रयोग कर सकता है. शेष गांवों एवं मजरों में भी सामुदायिक शौचालयों निर्माण की प्रक्रिया चल रही है. इतना ही नहीं स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के फेस प्रथम के तहत सभी ग्राम पंचायतों में अब तक दो लाख 25 हजार चार सौ 99 ग्रामीणों के घरों में निजी शौचालय बन चुके हैं. इन शौचालयों के निर्माण के लिए 12 हजार रुपए के हिसाब से प्रत्येक शौचालय के लिए ग्रामीणों दो अरब 70 करोड़ 59 लाख रुपए की धनराशि भी सरकार की ओर प्रदान की गई है, वहीं स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के फेस द्वितीय के तहत 9518 ग्रामीणों के घरों में निजी शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा है. इसके लिए सरकार से 11 करोड़ 42 लाख 16 हजार रुपए की धनराशि आवंटित हुई है.
मिशन के तहत शौचालय बनाने के लिए धड़ाधड़ धनराशि आवंटन करने और सामुदायिक शौचालयों का निर्माण तो करा दिया गया, लेकिन लोगों की पृवत्ति बदलने के लिए जनजागरुकता पर खास ध्यान नहीं दिया गया. जनजागरुकता के मामले में जिला पंचायत राज विभाग की कार्यप्रणाली पर जहां सवाल उठ रहें, वहीं जिन स्वयं सहायता समूहों को इनके संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई उनके द्वारा भी इस काम में कोई खास रुचि नहीं दिखायी गयी. परिणामस्वरूप हालात जस से तस हैं. इस मामले में जिला पंचायत राज अधिकारी किरण चौधरी का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के घरों में निजी शौचालय और गांव में सामुदायिक शौचालय होने बावजूद ग्रामीण अभी भी खुले में शौच जा रहे हैं. इसके लिए ग्रामीणों की मानसिकता बदलनी होगी. ग्रामीण लोगों पर अभी भी पुरानी ही सोच हावी है.
रोडवेज डिपो के शौचालय बेहाल उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के मथुरा डिपो में शौचालय एवं मूत्रालय की हालत बहुत खराब है. कर्मचारी खुले में मूत्र त्याग करने तथा स्टैंडों पर पहुंचकर सार्वजनिक शौचालयों की सुविधा प्राप्त करने को मजबूर हैं. डिपो में लगभग 600 अधिकारी-कर्मचारी तैनात हैं, लेकिन सभी के लिए व्यवस्था नहीं है. सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक ने बताया कि पानी की व्यवस्था जल्द ठीक कराई जाएगी.


मथुरा न्यूज़ डेस्क
 

Share this story