Samachar Nama
×

Mandi हादसे ने पति को छीन लिया, हालात से लड़ते हुए रक्षा ने बच्चों को दी उच्च शिक्षा

Mandi हादसे ने पति को छीन लिया, हालात से लड़ते हुए रक्षा ने बच्चों को दी उच्च शिक्षा

हिमाचल प्रदेश न्यूज़ डेस्क, करीब 13 साल पहले 1 सितंबर की वो शाम उदास थी। 23 परिवारों के जीवन में अंधेरा छा गया। किसी ने पति खोया तो किसी ने बेटा खोया। एक मां अपने बच्चों से बिछड़ गई तो एक बहन के जाने से भाई की कलाई सूनी हो गई। निजी बस हादसे में 23 घरों में चीख-पुकार की गूंज आज भी परिजनों के कानों में सुनाई दे रही है. 1 सितंबर 2009 को सुंदरनगर के कांगू में ख्याली मोड़ पर एक निजी बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे के कारण नगर परिषद सुंदरनगर के वार्ड 12 की पार्षद रक्षा धीमान के जीवन में भूचाल आ गया. भारतीय स्टेट बैंक की हरनोदा शाखा में मैनेजर के पद पर कार्यरत धर्मपाल धीमान की मौत के कारण तीन बेटियों और एक बेटे की जिम्मेदारी रक्षा धीमान पर आ गई. अब बच्चों की परवरिश कैसे होगी? परिवार कैसे चलेगा, लेकिन बेटियों ने मां को ढांढस बंधाया। बेटियों का यही सहारा उनके जीवन का सहारा बना। तीन बेटियों और सबसे छोटे बेटे को पढ़ाने से लेकर बेटियों की शादी कराने तक उन्होंने पूरी शिद्दत से अपने दायित्वों का निर्वहन किया।

बच्चों को पालने में कोई कसर नहीं छोड़ी
रक्षा धीमान की सबसे बड़ी बेटी नितिका ने एमकॉम और बीएड पूरा किया। सुंदरनगर के ही नरेश चौक में एक अच्छे परिवार में उनका विवाह हो गया। उन्होंने छोटी बेटी पूजा को एलएलबी की पढ़ाई कराई। वह जावली, कांगड़ा में सहायक विधि व्यवसायी के पद पर कार्यरत हैं। सबसे छोटी बेटी दीपाली ने टेक्सटाइल में बीटेक किया है और बरनाला में एक निजी कंपनी में वरिष्ठ पद पर कार्यरत है। बेटा प्रीक्षित धीमान ने हिमाचल टेक्निकल यूनिवर्सिटी से बीटेक किया है और आगे की तैयारी कर रहा है।

सात हजार पेंशन से गुजारा करते थे
रक्षा धीमान के मुताबिक पति की मौत के बाद उन्हें सात हजार की पेंशन मिलती थी। पेंशन की इस राशि से बच्चों की पढ़ाई और घर का अन्य खर्च चलता था। एक पार्षद के रूप में, वह बीबीएमबी प्रबंधन द्वारा उपलब्ध कराए गए कमरों में रहती हैं।
मंडी न्यूज़ डेस्क!!!
 

Share this story