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Madhubani 28 दिन नवजातों के जीवन के लिए सबसे अहम, ठंड में नवजात की सेहत का रखें खास ख्याल
 

Madhubani 28 दिन नवजातों के जीवन के लिए सबसे अहम, ठंड में नवजात की सेहत का रखें खास ख्याल

बिहार न्यूज़ डेस्क जन्म के बाद पहले 28 दिन उसके जीवन व विकास के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण होते हैं. बचपन के किसी अन्य अवधि की तुलना में नवजात के मृत्यु की संभावना इस दौरान अधिक होती है. इसलिये कहा जाता है कि नवजात के जीवन का पहला महीना आजीवन उसके स्वास्थ्य व विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण होता है.

शिशु मृत्यु दर के मामलों में कमी लाने व छह माह तक शिशुओं के बेहतर देखभाल के प्रति आम लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल बीच नवजात सुरक्षा सप्ताह के रूप में मनाया जाता है. इस साल ‘सुरक्षा, गुणवत्ता और पोषण देखभाल, प्रत्येक नवजात शिशु का जन्मसिद्ध अधिकार’ के थीम पर नवजात सुरक्षा सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है.

नवजात सुरक्षा सप्ताह कार्यक्रम को महत्वपूर्ण बताते हुए सिविल सर्जन डॉ सुनील कुमार झा ने कहा कि जन्म के पहले 28 दिनों में नवजात मृत्यु के अधिकांश मामले घटित होते हैं. एसआरएस 2020 के अनुसार राज्य का नवजात मृत्यु दर 21/1000 जीवित जन्म से एसडीजी का लक्ष्य 2030 तक नवजात मृत्यु दर 12/1000 जीवित जन्म तथा नेशनल हेल्थ पॉलिसी का लक्ष्य 2025 तक नवजात मृत्यु दर 16/1000 जीवित जन्म है. इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बिहार सरकार सतत प्रयासरत है इसी क्रम में प्रति वर्ष की तरह से नेशनल न्यू वन वीक मनाया जा रहा है.
डॉ झा ने कहा इसलिये जोखिम के कारणों की पहचान, उसका उचित प्रबंधन नवजात मृत्यु दर के मामलों को कम करने के लिये जरूरी है. इसलिये नवजात के स्वास्थ्य संबंधी मामलों के प्रति व्यापक जागरूकता जरूरी है.
डॉ झा ने बताया कि ठंड में बच्चों को विशेष देखभाल की जरूरत होती है. शिशुओं को इस समय अधिक उर्जा की जरूरत होती है. इसलिए नियमित अंतराल पर स्तनपान जरूरी है. इसके अलावा एक दो दिन के अंतराल पर बच्चे को गुनगुना पानी से नहलाएं, त्वचा की अच्छी से मालिश करें. बच्चे के कपड़ों को हमेशा साफ रखें.
शरीर के तापमान को बनाये रखने के लिये त्वचा से त्वचा का संपर्क जरूरी है. इसके लिये कंगारू मदर केयर तकनीक शरीर के सामान्य तापमान को बनाये रखने के लिये सुरक्षित, प्रभावी व वैज्ञानिक रूप से सिद्ध तरीका है.
स्वच्छता, टीकाकरण व उचित पोषण जरूरी
सीएस ने कहा कि प्री-मैच्योरिटी, प्रीटर्म व संक्रमण व जन्मजात विकृतियां नवजात की मौत के प्रमुख कारणों में से एक है. नवजात के स्वस्थ जीवन में टीकाकरण, स्वच्छता संबंधी मामलों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है. जन्म के एक घंटे बाद नवजात के लिए मां का गाढ़ा पीला दूध का सेवन जरूरी करायें.
उचित पोषण के लिये छह माह तक मां के दूध के अलावा किसी अन्य चीज के उपयोग से परहेज करें. बच्चों के वृद्धि व विकास को बढ़ावा देने के लिये उचित पोषण महत्वपूर्ण है.

मधुबनी न्यूज़ डेस्क
 

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