उत्तरप्रदेश न्यूज़ डेस्क सरकार की महत्वपूर्ण योजना मनरेगा के कामकाज की निगरानी और गड़बड़ियों की जांच के लिए जिले में मनरेगा लोकपाल की नियुक्ति तो कर दी गई है लेकिन उनके पास ना तो स्टाफ है और ना वाहन हैं, ऐसे में मनरेगा लोकपाल कैसे काम कर सकते हैं. यह बड़ा सवाल है कि सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना की निगरानी के लिए जो व्यवस्था की गई है वह आधी अधूरी है. इससे सरकार की मंशा भी पूरी नहीं हो पा रही है.
मनरेगा केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना है और मनरेगा योजना की निगरानी करने के लिए लगातार सरकार पर लोकपाल नियुक्त करने के लिए दबाव था. शासन की ओर से लोकपाल की नियुक्ति न होने तक मनरेगा से जुड़े सभी भुगतान रोकने के आदेश दे दिए गए थे. इसके बाद जिले में भी लोकपाल मनरेगा के रूप में एससी त्रिपाठी की नियुक्ति की गई. 23 मार्च 2024 को उन्होने कार्यभार तो संभाल लिया लेकिन अभी तक विभिन्न जरूरी संसाधन भी उनके पास नहीं हैं.
लोकपाल की नियुक्ति के बाद लोकपाल को बैठने के लिए विकास भवन में एक कक्ष तो दे दिया गया है, लेकिन न तो उनके आने जाने के लिए कोई वाहन की व्यवस्था की गई है. और न ही स्टाफ है. लोकपाल मनरेगा के पास अनुदेशक, कंप्यूटर ऑपरेटर की व्यवस्था की गई है लेकिन किसी की भी तैनाती नहीं की गई है. जांच के लिए भी आने जाने में लोकपाल को परेशानी का सामना करना पड़ा है. वह किसी अन्य अधिकारी के साथ जाने के लिए आश्रित हैं. कक्ष में कुछ समय पहले लगाया गया कंप्यूटर भी सारा सिस्टम इंस्टॉल न होने की वजह से सिर्फ शोपीस बना हुआ है. मनरेगा के तहत होने वाले कार्यों की निगरानी के लिए लोकपाल को नियुक्त करने की व्यवस्था 2009 में की गई थी. हालांकि जिले में 2024 में लोकपाल की नियुक्ति हो सकी है. मनरेगा में कोई भी गड़बड़ी दिखने पर कोई भी व्यक्ति लोकपाल से शिकायत कर सकता है. इसके अतिरिक्त लोकपाल शिकायत का संज्ञान लेकर स्वत: जांच करेंगे. इसके बाद दोषी पाए जाने वाले कर्मचारी और अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए लोकपाल डीएम और शासन को पत्र लिखा जाता है.
लखनऊ न्यूज़ डेस्क

