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कोटा हॉस्पिटल मौत मामले पर मचा हंगामा, चिकित्सा मंत्री आज बीमार प्रसूताओं परिजन से मिलेंगे, वीडियो में जानें निलंबन के विरोध में टीचर्स डॉक्टर बांधेंगे काली पट्टी 

कोटा हॉस्पिटल मौत मामले पर मचा हंगामा, चिकित्सा मंत्री आज बीमार प्रसूताओं परिजन से मिलेंगे, वीडियो में जानें निलंबन के विरोध में टीचर्स डॉक्टर बांधेंगे काली पट्टी

राजस्थान के कोटा स्थित सरकारी अस्पताल में चार प्रसूताओं की मौत और कई महिलाओं की तबीयत बिगड़ने के मामले ने अब बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक रूप ले लिया है। घटना के नौ दिन बाद गुरुवार को चिकित्सा मंत्री Gajendra Singh Khimsar कोटा पहुंचेंगे, जहां वे बीमार प्रसूताओं और उनके परिजनों से मुलाकात कर हालात का जायजा लेंगे।

इस बीच राज्य सरकार ने इलाज में कथित लापरवाही को लेकर बड़ी कार्रवाई करते हुए दो डॉक्टरों और दो नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई जयपुर से आई विशेषज्ञ टीम की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई।

सरकार की इस कार्रवाई के बाद अब डॉक्टर संगठनों में नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। Rajasthan Medical College Teachers Association की कोटा इकाई ने निलंबन को एकतरफा बताते हुए विरोध शुरू कर दिया है।

संगठन के अध्यक्ष डॉक्टर एससी दुलारा ने बयान जारी कर कहा कि डॉक्टरों का पक्ष सुने बिना ही कार्रवाई कर दी गई, जो पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों को बिना निष्पक्ष सुनवाई के दोषी ठहराना मेडिकल समुदाय का मनोबल गिराने वाला कदम है।

डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि 14 मई से सभी टीचर डॉक्टर काली पट्टी बांधकर काम करेंगे। साथ ही संगठन ने साफ किया कि यदि दो दिन के भीतर उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो सभी टीचर डॉक्टर गैर शैक्षणिक और गैर चिकित्सीय कार्यों का बहिष्कार करेंगे। इस पूरे मामले के बाद अस्पताल प्रशासन, सरकार और डॉक्टर संगठनों के बीच तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। वहीं मृत महिलाओं के परिजन लगातार न्याय और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

राजनीतिक दल भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर हैं और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच जारी है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल पूरे प्रदेश की नजर मंत्री के कोटा दौरे और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है, क्योंकि यह मामला अब स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।

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