कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसव के बाद महिलाओं की मौत का मामला गरमाया, वीडियो में देंखे पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने उठाए गंभीर सवाल
राजस्थान के कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में सीजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं की मौत और गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं के मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। इस पूरे प्रकरण को लेकर राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot मंगलवार को अस्पताल के SSB ब्लॉक पहुंचे। उन्होंने वहां भर्ती प्रभावित महिलाओं से मुलाकात की और उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग से कई तीखे सवाल भी किए।
यह मामला Kota Medical College Hospital से जुड़ा हुआ है, जहां सीजेरियन डिलीवरी के बाद कुछ महिलाओं की हालत अचानक बिगड़ गई। जानकारी के अनुसार, कुछ महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि पांच अन्य महिलाएं अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं और उनका इलाज जारी है।चिकित्सकीय रिपोर्टों के अनुसार, इन सभी प्रभावित महिलाओं की किडनी पर गंभीर असर पड़ा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि कुछ मरीजों को सप्ताह में तीन बार, कुछ को दो बार और कुछ को एक बार डायलिसिस की आवश्यकता पड़ रही है। यह स्थिति सामान्य प्रसव जटिलताओं से कहीं अधिक गंभीर मानी जा रही है।
अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक इस बात का स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है कि प्रसव के बाद महिलाओं की हालत इतनी गंभीर कैसे हुई। इस अनिश्चितता ने परिजनों और स्थानीय लोगों की चिंता को और बढ़ा दिया है।पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने इस मामले को “बेहद गंभीर” बताते हुए कहा कि यह कोई सामान्य घटना नहीं है, बल्कि इसमें गहन जांच की आवश्यकता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाए।
घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनाव का माहौल बना हुआ है और परिजनों में आक्रोश देखा जा रहा है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की टीम स्थिति पर नजर बनाए हुए है और मरीजों के इलाज को प्राथमिकता दी जा रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में संक्रमण नियंत्रण, दवाओं की गुणवत्ता और अस्पताल प्रोटोकॉल की गहन जांच आवश्यक होती है, ताकि वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। फिलहाल इस पूरे मामले में जांच की मांग तेज हो गई है और राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा उठने लगा है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आखिर इन गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं के पीछे असली कारण क्या हैं।

