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कोटा के जेके लोन अस्पताल पर गंभीर आरोप: थैलेसीमिया पीड़ित बच्ची को संक्रमित ब्लड चढ़ाने से HIV होने का दावा, वीडियो में जाने जांच की मांग

कोटा के जेके लोन अस्पताल पर गंभीर आरोप: थैलेसीमिया पीड़ित बच्ची को संक्रमित ब्लड चढ़ाने से HIV होने का दावा, वीडियो में जाने जांच की मांग

राजस्थान के कोटा स्थित जेके लोन अस्पताल में कथित लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। थैलेसीमिया से पीड़ित एक 8 साल की बच्ची को संक्रमित ब्लड चढ़ाए जाने से HIV संक्रमण होने का आरोप लगाया गया है। इस घटना के बाद पीड़ित परिवार सदमे में है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि अस्पताल में 26 जून को बच्ची को ऐसा खून चढ़ाया गया, जिसमें HIV वायरस मौजूद था। बच्ची पहले से ही थैलेसीमिया बीमारी से पीड़ित थी, जिसके कारण उसे नियमित रूप से खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती थी। परिवार के मुताबिक, बच्ची को महीने में करीब 2 से 3 बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन कराना पड़ता था।

बच्ची के पिता ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि अस्पताल की लापरवाही ने उनकी बेटी की जिंदगी बदल दी। उन्होंने आरोप लगाया कि संक्रमित खून चढ़ने के बाद बच्ची की हालत खराब हो गई और जांच में उसके HIV पॉजिटिव होने की बात सामने आई। पिता का कहना है कि बच्ची लगातार परेशान है, उसे उल्टियां हो रही हैं और इलाज के बावजूद उसकी तकलीफ कम नहीं हो रही।

परिवार का कहना है कि बेटी की HIV रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उन्होंने भी अपना और अपनी पत्नी का HIV टेस्ट कराया। राहत की बात यह रही कि दोनों की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। हालांकि, बेटी की बीमारी की खबर ने पूरे परिवार को मानसिक रूप से तोड़ दिया है।

बताया जा रहा है कि ऐसा मामला सिर्फ एक बच्ची तक सीमित नहीं है। आरोप है कि अस्पताल में दो थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को संक्रमित रक्त चढ़ाया गया, जिसके बाद दोनों HIV संक्रमित पाए गए। दोनों परिवारों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है।

पीड़ित परिवार ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिस भी स्तर पर लापरवाही हुई है, उसके जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। परिवार का कहना है कि बच्चों को सुरक्षित और जांचा हुआ रक्त उपलब्ध कराना अस्पताल की जिम्मेदारी है, लेकिन लापरवाही के कारण मासूमों की जिंदगी खतरे में पड़ गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन से जांच की मांग की जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, ब्लड ट्रांसफ्यूजन से पहले रक्त की HIV सहित अन्य संक्रमणों की जांच अनिवार्य होती है। ऐसे में यदि संक्रमित रक्त चढ़ने की पुष्टि होती है तो यह स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ी चूक मानी जाएगी।

फिलहाल मामले में आधिकारिक जांच और रिपोर्ट का इंतजार है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संक्रमित रक्त अस्पताल की किस प्रक्रिया में शामिल लापरवाही के कारण मरीज तक पहुंचा। वहीं, पीड़ित परिवार न्याय और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की उम्मीद कर रहा है।

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