बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने की मांग कोटा उपभोक्ता फोरम में की गई है। यह कदम तब उठाया गया जब सलमान खान व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हुए, जबकि फोरम ने उन्हें मामले में उपस्थित होने का आदेश दिया था।
मामला पान मसाला विज्ञापन से जुड़ा हुआ है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सलमान खान ने विज्ञापन में ऐसा संदेश दिया, जो उपभोक्ताओं के हितों और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता के खिलाफ था। फोरम ने इस मामले में पहले ही सलमान खान को पेश होने का निर्देश दिया था, लेकिन अभिनेता द्वारा अनुपस्थिति बनाए जाने के कारण शिकायतकर्ता ने कोर्ट में विरोध दर्ज कराया।
शिकायतकर्ता और उनके वकील ने यह भी कहा कि यदि सलमान खान अगली तारीख पर भी पेश नहीं हुए, तो उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया जाए। वकील ने कहा कि अदालत के आदेशों का पालन करना हर नागरिक के लिए अनिवार्य है, चाहे वह आम नागरिक हो या किसी हाई-प्रोफाइल हस्ती।
विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ता फोरम में किसी भी व्यक्ति की अनुपस्थिति, विशेष रूप से आदेश के बाद, न्यायिक अनुशासन का उल्लंघन माना जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के आदेश का पालन न करने पर सख्त कानूनी कार्रवाई संभव है।
फोरम की कार्रवाई इस बात की ओर इशारा करती है कि कानून के समक्ष हर व्यक्ति बराबर है, और किसी भी हाई-प्रोफाइल व्यक्ति को नियमों से ऊपर नहीं माना जा सकता। इसके अलावा, यह मामला उपभोक्ता संरक्षण और विज्ञापन में जिम्मेदारी के विषय पर भी नए बहस को जन्म दे रहा है।
उल्लेखनीय है कि पान मसाला और अन्य खाद्य उत्पादों के विज्ञापन पर विवाद अक्सर स्वास्थ्य और जागरूकता से जुड़े रहते हैं। इस मामले में सलमान खान की अनुपस्थिति ने समीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित किया है और फोरम के सामने गंभीर कानूनी सवाल खड़े कर दिए हैं।
अगली सुनवाई में सलमान खान के पेश होने या न होने के आधार पर फोरम कार्रवाई की दिशा तय करेगा। यदि अभिनेता पेश नहीं होते हैं, तो गिरफ्तारी वारंट जारी होने की संभावना बढ़ जाएगी।
इस पूरे मामले ने यह स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता फोरम और न्यायिक प्रक्रिया के आदेशों का पालन करना सभी के लिए अनिवार्य है। साथ ही यह घटना सेलेब्रिटी और कानूनी जवाबदेही के बीच संतुलन की महत्ता को भी उजागर करती है।

