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Kanpur  शीर स्टेफनिंग जेली ई-वाहनों को बनाएगी फायरप्रूफ

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उत्तरप्रदेश न्यूज़ डेस्क   कानपुर में बनी शीर स्टेफनिंग जेली अब ई-वाहनों को फायरप्रूफ बनाएगी. कानपुर स्थित रक्षा मंत्रालय की लैब डीएमएसआरडीई ने पिछले साल विकसित की गई जेली के औद्योगीकरण पर सहमति जता दी है. यह जेली हर छोटी-बड़ी बैटरियों को आग लगने से बचाती है और इलेक्ट्रिक वाहनों का सबसे अहम हिस्सा बैटरी ही होती है. जेली बनाने की तकनीक इंडस्ट्री को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. उद्योगों में बड़ी मात्रा में जेली बनने के बाद इसे बैटरी उत्पादन में लगी फैक्ट्रियों को दिया जा सकेगा. इसी के साथ ऑटोमोबाइल सेक्टर में भारत अग्रणी भूमिका निभाने वाले देशों की लिस्ट में शामिल हो जाएगा. डीएमएसआरडीई ने भारतीय नौसेना के समुद्री जहाजों और पनडुब्बियों की बैटरी में लगने वाली आग से सुरक्षा के लिए जेली को तैयार किया है.

तीन सेकेंड में बुझा देती है आग : डीएमएसआरडीई के वैज्ञानिकों ने अग्निरोधी तत्व जेली को नैनो पार्टिकल से बनाया है. इसे शीर स्टेफनिंग जेली नाम दिया गया है. यह लीथियम आयन बैटरी को ढक लेती है, जिससे बैटरी में लगी आग तीन सेकेंड में बुझ जाती है. विशाखापट्टनम की नेवल साइंस एंड टेक्नोलॉजिकल लेबोरेटरी में इसके सफल परीक्षण के बाद पेटेंट कराया जा चुका है. जेली से पैक बैटरी अत्यधिक गर्म होने के बाद हुए ब्लास्ट के बाद ज्वलनशील इलेक्ट्रोलाइट जेली कवच के बाहर नहीं आ पाती है और यही वजह है कि आग नहीं लग पाती है. बाहरी तत्वों से लगी बैटरी की आग दो-तीन सेकेंड में बुझ जाती है. भारत में अभी तक इस जेली को यूरोपीय देशों और अमेरिका से निर्यात किया जाता रहा है. आयातित जेली युक्त बैटरी में लगी आग 90 सेकेंड में बुझ पाती है.

ई-वाहनों में आग की घटनाएं बढ़ीं

पिछले वर्षों में ई-वाहनों में आग लगने की अधिकतर वजह बैटरी के गर्म होने और उसमें ब्लास्ट की रही है. खड़े-खड़े इलेक्ट्रिक स्कूटी में आग लगने के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए. इसके बाद पुणे की ऑटोमेटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) ने भी आग की घटनाओं को रोकने के लिए इस तरह के शोध की जरूरत रक्षा क्षेत्र की प्रयोगशाला के सामने जताई थी. एआरएआई ही ई-वाहन निर्माता कंपनियों को सुरक्षा प्रमाण पत्र देता है. रिसर्च टीम में निदेशक डॉ. मयंक द्विवेदी, सहायक निदेशक डॉ. किंग्शुक मुखोपाध्याय, प्रोजेक्ट लीडर डॉ. देबमाल्या रॉय शामिल रहे. सुभाष मंडल, संजय कनौजिया, रजत झा और आदित्य व्यास का सहयोग रहा.

 

 

कानपूर न्यूज़ डेस्क

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