उत्तरप्रदेश न्यूज़ डेस्क मल्टीनेशनल कंपनी में बड़े पद पर कार्यरत 43 वर्षीय महिला को मामूली सर्दी-खांसी व बुखार में एंटीबायोटिक लेने की आदत है. लंबे समय तक ऐसा करके उन्होंने लिवर खराब कर लिया. 39 वर्षीय रियल इस्टेट से जुड़े युवक को सिर दर्द की परेशानी आए दिन होती है. एंटी बायोटिक से आराम मिला तो आदत बना ली. इसका सीधा असर किडनी पर पड़ा. ये दो मामले सिर्फ बानगी भर हैं. यह बता रहे हैं कि मामूली बुखार और दर्द में दवा संग एंटी बायोटिक लेना कितना खतरनाक है. जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के अध्ययन में इसका खुलासा हुआ है. रिसर्च में दावा किया गया कि बेवजह और जल्दी-जल्दी एंटी बायोटिक लेना शरीर के महत्वपूर्ण अंगों की सेहत को नुकसान पहुंचाना है. जुलाई से तक हुए अध्ययन में 20 से 52 साल की उम्र वाले 3800 मरीज शामिल किए गए. इनमें 78 फीसदी ऐसे हैं जो मामूली खांसी-बुखार में खुद ही एंटी बायोटिक लेकर सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं.
डेंगू, मलेरिया में पहली खुराक से ही अनदेखी
डॉक्टरों के मुताबिक डेंगू, मलेरिया, सामान्य वायरल में सिर्फ दवा से ही मरीज स्वस्थ हो सकता है पर अधिकांश मरीज पहली खुराक से ही एंटी बायोटिक भी ले रहे हैं. इससे ठीक तो हुए पर शरीर के अंदरूनी हिस्सों को काफी नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ गया. अध्ययन में एंटी बायोटिक लेने वाले मरीजों की काउंसिलिंग की गई तो उनकी सोच पर डॉक्टर भी हैरान हो गए. उनका मानना है कि जल्द स्वस्थ होने के लिए एंटी बायोटिक लेना बेहद जरूरी है. बगैर इसके सामान्य बुखार से भी लंबे समय तक निजात नहीं मिलने वाली है. बच्चों के मामले भी उनकी यही सोच है.
● जल्द स्वस्थ होने का भ्रम आंत, गुर्दे, लिवर व पाचन की सेहत पर पड़ रहा भारी
● जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के अध्ययन में सामने आई बात
डॉक्टर बोले-इन बातों का रखें ख्याल
● बुखार आने के पांच दिन तक न लें एंटीबायोटिक
● खांसी आने के एक हफ्ते बाद ही लें एंटी बायोटिक
● पहली खुराक से एंटी बायोटिक लेने की आदत गलत
● बगैर डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा कतई न लें
● मेडिकल स्टोर या बाजार से खुद दवा का सेवन खतरनाक
मामूली खांसी-बुखार में खुद ही एंटी बायोटिक लेने वाले मरीजों का आंकड़ा लगभग 78 फीसदी है. जल्द स्वस्थ होने का भ्रम आंत, गुर्दे, लिवर, पाचन की सेहत पर भारी पड़ रहा है. किसी भी स्थिति में पहली खुराक से खुद एंटी बायोटिक लेना खतरनाक है. इससे बचना जरूरी है.
- डॉ. एसके गौतम, प्रो. जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज
कानपूर न्यूज़ डेस्क

