Samachar Nama
×

Kanpur  18 माह में लोन की लिमिट 150 करोड़ से 900 करोड़, रोटोमैक समूह फ्रॉड मामले में फंसे बैंक अफसरों ने बढ़वाई लिमिट
 

Kanpur  18 माह में लोन की लिमिट 150 करोड़ से 900 करोड़, रोटोमैक समूह फ्रॉड मामले में फंसे बैंक अफसरों ने बढ़वाई लिमिट


उत्तरप्रदेश न्यूज़ डेस्क   रोटोमैक समूह के 3700 करोड़ के फ्रॉड की सीबीआई जांच में बैंक के वरिष्ठ अफसर भी फंस गए हैं. फोरेंसिक जांच में रोटोमैक को दिए गए लोन में कदम-कदम पर नियमों की धज्जियां उड़ाने का खुलासा हुआ है. 18 महीने में लोन लिमिट को 150 करोड़ से 900 करोड़ कर दिया गया.

रोटोमैक में हुए अरबों के बैंक घोटाले की जांच में परत-दर-परत खुलासे हो रहे हैं. सीबीआई रिपोर्ट के मुताबिक रोटोमैक समूह को 20 दिसंबर 2010 को एलसी लिमिट के रूप में 150 करोड़ रुपए दिए गए. दस महीने बाद 21 अक्तूबर 2011 को इसे बढ़ाकर 350 करोड़ रुपए कर दिया गया. आठ महीने बाद ही 28 जून 2012 को लिमिट बढ़ाकर 500 करोड़ कर दी गई. 28 जून को ही लखनऊ से आए फोन के बाद लेटर ऑफ क्रेडिट लिमिट सीधे 900 करोड़ हो गई.
इन सात बैंकों की डूबी रकम
● इंडियन ओवरसीज बैंक 771.07
● बैंक ऑफ बड़ौदा 456.63
● बैंक ऑफ इंडिया 754.77
● इलाहाबाद बैंक 330.68
● यूनियन बैंक 458.95
● बैंक ऑफ महाराष्ट्र 49.82
● ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स 97.47
(रुपये करोड़ में)
(आज ब्याज लगाकर ये रकम 3800 करोड़ है)
यहां भी रही मिली बैंक अफसरों की मिलीभगत
● बैंक अफसरों ने उस सिक्योरिटी पर करोड़ों का लोन दे दिया, जो पहले ही बैंक के पास थीं, जिनकी कीमत बहुत कम थी.
● मर्चेंट ट्रेड के कई मामलों में संपूर्ण मर्चेंट ट्रेड नौ महीने की कुल अवधि के भीतर पूरा नहीं हुआ और बैंकों ने जानबूझकर इसकी सूचना आरबीआई को नहीं दी.
● मर्चेंटिंग ट्रेड के एक से एक मिलान के रूप में दिशा-निर्देशों को ताक पर रखा गया.
● सीए, आडिटर, बैंक आडिटर, स्टॉक लेखा परीक्षकों और पैनलबद्ध वैल्यूअरों ने कदम-कदम पर रोटोमैक का साथ दिया.
● पैसा फंसने के बावजूद बैंक आरबीआई को लिखित में भरोसा दिलाते रहे कि कहीं कोई विरोधाभास नहीं है.
बिना कागजों के दे दिया 240 करोड़ का लोन
रोटोमैक ने कई कंपनियों पर अपनी उधारी दिखाई, जिसमें गल्फ डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड को 240.07 करोड़ का लोन देना बैंकों को बताया. फोरेंसिक ऑडिट में इस रकम को शून्य ठहराया गया,क्योंकि उधार देने के एवज में न तो दस्तावेज थे और न ही पूरी सूचना थी. जांच में खुलासा हुआ कि रोटोमैक ने 31 मार्च 2015 को कंपनी निदेशक राहूल कोठारी को 9.59 करोड़ का लोन दे दिया, जबकि कंपनी एक्ट के नियमों के मुताबिक निदेशक मंडल को लोन किसी सूरत में नहीं दिया जा सकता. बाद में लोन की वापसी भी कागजों में दिखाई गई,लेकिन उस पर किसी तरह का ब्याज नहीं लिया गया.


कानपूर न्यूज़ डेस्क
 

Share this story