जोधपुर जेल में भी जारी है सोनम वांगचुक का इनोवेशन, दो मिनट के वीडियो में देंखे गर्मी से राहत के लिए कर रहे प्रयोग, स्टाफ ले रहा पेरेंटिंग टिप्स
लद्दाख के मशहूर एक्टिविस्ट और साइंटिस्ट सोनम वांगचुक इन दिनों जोधपुर सेंट्रल जेल में हैं, लेकिन जेल की चारदीवारी भी उनके नवाचार और प्रयोगों को रोक नहीं पाई है। जेल में रहते हुए भी सोनम वांगचुक लगातार इनोवेशन में जुटे हुए हैं। वे जोधपुर जेल को गर्मियों में ठंडा रखने और सर्दियों में गर्म रखने के लिए एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं। इतना ही नहीं, जेल का स्टाफ भी उनसे बेहतर पेरेंटिंग और जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण टिप्स ले रहा है। इसका खुलासा उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो ने किया है।
गीतांजलि अंगमो एक आंत्रप्रेन्योर हैं और वह अक्सर सोनम वांगचुक से मिलने जोधपुर जेल आती रहती हैं। उन्होंने बताया कि सोनम जेल के माहौल को सकारात्मक और उपयोगी बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं। गीतांजलि के अनुसार, सोनम न केवल जेल के बैरकों के तापमान को संतुलित रखने के तरीकों पर काम कर रहे हैं, बल्कि जेल कर्मचारियों से बच्चों की परवरिश, शिक्षा और जीवन मूल्यों को लेकर भी चर्चा करते रहते हैं।
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक वही शख्स हैं, जिनके जीवन और विचारों से प्रेरित होकर मशहूर हिंदी फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ बनाई गई थी। शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में उनके प्रयोग और विचार देश-दुनिया में पहले से ही चर्चित रहे हैं। वर्तमान में वे पिछले चार महीने से जोधपुर जेल में बंद हैं। उन्हें लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया था।
जेल में रहते हुए भी सोनम वांगचुक ने अपने प्रयोगों को जारी रखा है। उन्होंने हाल ही में बताया था कि सुप्रीम कोर्ट और जेल अथॉरिटी के माध्यम से उन्हें कुछ जरूरी इंस्ट्रूमेंट्स और थर्मामीटर उपलब्ध कराए गए हैं। इन उपकरणों की मदद से वे जेल के बैरकों की संरचना और तापमान पर अध्ययन कर रहे हैं। उनका उद्देश्य ऐसा सिस्टम विकसित करना है, जिससे गर्मियों में बैरक ठंडे और सर्दियों में गर्म रह सकें, ताकि कैदियों को मौसम की मार से राहत मिल सके।
सोनम वांगचुक इससे पहले भी कई इनोवेटिव प्रयोग कर चुके हैं। लद्दाख जैसे ठंडे इलाके में आइस स्तूपा का प्रयोग हो या फिर वैकल्पिक शिक्षा मॉडल, उनके प्रयोगों ने हमेशा नई राह दिखाई है। जेल में भी वे अपने समय का उपयोग किताबें पढ़ने, अध्ययन करने और नए विचारों पर काम करने में कर रहे हैं। गीतांजलि अंगमो के अनुसार, सोनम मानते हैं कि किसी भी परिस्थिति में सीखना और समाज के लिए कुछ बेहतर करना बंद नहीं होना चाहिए।
जोधपुर जेल में सोनम वांगचुक की मौजूदगी से माहौल में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। जेल स्टाफ का कहना है कि उनसे बातचीत कर कई कर्मचारी अपने बच्चों की पढ़ाई और परवरिश को लेकर नई सोच अपना रहे हैं। सोनम का यह प्रयास दिखाता है कि सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों में भी नवाचार और सकारात्मक सोच से बदलाव संभव है।
कुल मिलाकर, जोधपुर जेल में बंद होने के बावजूद सोनम वांगचुक अपने विचारों और प्रयोगों के जरिए यह संदेश दे रहे हैं कि ज्ञान, विज्ञान और समाजसेवा की कोई सीमा नहीं होती। उनकी यह पहल न सिर्फ जेल व्यवस्था के लिए उपयोगी साबित हो सकती है, बल्कि आने वाले समय में सुधार की एक नई मिसाल भी बन सकती है।

