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राजस्थान आयुर्वेद विवि: मंत्रों से होगा बीमारियों का इलाज, IIT की मदद से बढ़ेगा शोध क्षेत्र

राजस्थान आयुर्वेद विवि: मंत्रों से होगा बीमारियों का इलाज, IIT की मदद से बढ़ेगा शोध क्षेत्र

राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय ने हाल ही में एक अनोखी पहल की घोषणा की है, जिसके तहत परंपरागत आयुर्वेदिक उपचार के साथ-साथ मंत्रों के प्रयोग से बीमारियों के इलाज की संभावना का अध्ययन किया जाएगा। विश्वविद्यालय का मानना है कि आयुर्वेद और प्राचीन मंत्र चिकित्सा का संयोजन रोगियों के लिए नई उम्मीदें पैदा कर सकता है।

विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार, रात्रिसूक्तम मंत्र के सफल प्रयोग ने इस दिशा में शोधकर्ताओं का उत्साह बढ़ा दिया है। पिछले कुछ वर्षों में किए गए प्रारंभिक प्रयोगों में कुछ रोगियों में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव देखा गया है। इस सफलता को देखते हुए विश्वविद्यालय ने इस अध्ययन को औपचारिक रूप देने का निर्णय लिया है।

इस पहल में तकनीकी सहयोग के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) से भी मदद ली जाएगी। IIT के वैज्ञानिक और इंजीनियर अध्ययन में आधुनिक तकनीकी उपकरणों और डेटा विश्लेषण की मदद करेंगे, ताकि मंत्रों और आयुर्वेदिक उपायों के प्रभाव को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से मापा और प्रमाणित किया जा सके। विश्वविद्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि यह प्रयास पारंपरिक और आधुनिक विज्ञान के बीच सेतु का काम करेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि मंत्र चिकित्सा, जिसे आयुर्वेद में ‘संकल्प और ध्वनि चिकित्सा’ के रूप में जाना जाता है, लंबे समय से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार के लिए उपयोग की जाती रही है। हालांकि, इसे लेकर व्यापक वैज्ञानिक प्रमाणों की कमी रही है। IIT के सहयोग से विश्वविद्यालय इन उपायों के प्रभाव को डिजिटल डेटा, बायोफीडबैक और मेडिकल रिकॉर्ड्स के माध्यम से प्रमाणित करने की योजना बना रहा है।

विश्वविद्यालय ने यह भी बताया कि इस अध्ययन में मानसिक स्वास्थ्य, तनाव, नींद की गुणवत्ता, हृदय गति और अन्य शारीरिक संकेतों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मंत्रों के उच्चारण और ध्वनि तरंगों के प्रभाव को मापने के लिए उच्च तकनीकी उपकरणों का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा, रोगियों की प्रतिक्रिया और स्वास्थ्य में सुधार को नियमित रूप से दर्ज किया जाएगा।

आयुर्वेद विशेषज्ञों का मानना है कि रात्रिसूक्तम मंत्र विशेष रूप से मानसिक शांति, तनाव कम करने और शरीर में ऊर्जा संतुलन स्थापित करने में सहायक हो सकता है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय अन्य आयुर्वेदिक उपचारों जैसे हर्बल थेरेपी, योग और प्राणायाम को भी प्रयोगशाला परीक्षणों में शामिल करेगा।

राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय की यह पहल न केवल आयुर्वेद और मंत्र चिकित्सा को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ने का प्रयास है, बल्कि यह भारतीय परंपराओं को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस अध्ययन में सकारात्मक परिणाम आते हैं, तो भविष्य में मंत्र और आयुर्वेद आधारित चिकित्सीय उपचार एक नई दिशा में विकसित हो सकते हैं।

विश्वविद्यालय ने आम जनता और शोधकर्ताओं दोनों से इस प्रयोग में सहयोग और रुचि दिखाने की अपील की है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि सभी प्रयोग नैतिक और सुरक्षित तरीके से किए जाएंगे, ताकि रोगियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सर्वोपरि रहे।

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