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जोधपुर में गरजे राफेल-तेजस और F-35, वीडियो में देंखे शुरू हुआ ‘तरंग शक्ति-2026’; 8 देशों की वायु सेनाएं लेंगी हिस्सा

जोधपुर में गरजे राफेल-तेजस और F-35, वीडियो में देंखे शुरू हुआ ‘तरंग शक्ति-2026’; 8 देशों की वायु सेनाएं लेंगी हिस्सा

जोधपुर के आसमान में शनिवार को दुनिया के कई आधुनिक लड़ाकू विमानों की मौजूदगी देखने को मिली। भारतीय वायुसेना के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय युद्धाभ्यास ‘तरंग शक्ति-2026’ की शुरुआत जोधपुर एयरबेस से हो गई है। यह अभ्यास 12 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें भारत समेत 8 देशों की वायु सेनाएं हिस्सा ले रही हैं। अलग-अलग देशों के लड़ाकू विमान और एयर वॉरियर्स इस अभ्यास के जरिए अपनी ऑपरेशनल क्षमताओं का प्रदर्शन करेंगे। ‘तरंग शक्ति-2026’ में हिस्सा लेने के लिए करीब 100 एयरक्राफ्ट जोधपुर पहुंचे हैं। इसके अलावा 32 ऑब्जर्वर भी अभ्यास की गतिविधियों का जायजा ले रहे हैं। युद्धाभ्यास में 3,000 से ज्यादा एयर वॉरियर्स के शामिल होने की जानकारी दी गई है। अभ्यास का उद्देश्य अलग-अलग देशों की वायु सेनाओं के बीच समन्वय, इंटरऑपरेबिलिटी और संयुक्त अभियानों की क्षमता को बेहतर करना है।

इस युद्धाभ्यास की खासियत इसमें शामिल होने वाले आधुनिक लड़ाकू विमान हैं। भारतीय वायुसेना के राफेल, तेजस और सुखोई-30 MKI जैसे विमान इसमें हिस्सा ले रहे हैं। वहीं विदेशी विमानों में अमेरिका का पांचवीं पीढ़ी का F-35 और F-16 जैसे लड़ाकू विमान भी शामिल हैं। इसके साथ ही हवा में ही दूसरे विमान में ईंधन भरने वाले एयर-टू-एयर रिफ्यूलर भी अभ्यास का हिस्सा होंगे।अभ्यास के दौरान अलग-अलग देशों के विमान और वायुसेना कर्मी संयुक्त प्रशिक्षण गतिविधियों में हिस्सा लेंगे। इसका उद्देश्य वास्तविक परिस्थितियों में एक-दूसरे की कार्यप्रणाली को समझना और विभिन्न प्रकार के विमानों के बीच बेहतर तालमेल विकसित करना है। ऐसे अभ्यासों से वायुसेनाओं को संयुक्त अभियानों के दौरान संचार और समन्वय की प्रक्रियाओं को बेहतर तरीके से समझने का अवसर मिलता है।

‘तरंग शक्ति-2026’ में भारतीय वायुसेना ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सामने आई परिचालन संबंधी सीखों को प्रशिक्षण में शामिल करने पर भी ध्यान दे रही है। हालांकि, अभ्यास के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली विशिष्ट रणनीति और संवेदनशील ऑपरेशनल जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।इस अंतरराष्ट्रीय युद्धाभ्यास में केवल जोधपुर एयरबेस ही नहीं, बल्कि पश्चिमी सीमा क्षेत्र के अन्य एयरबेस भी शामिल किए जा रहे हैं। अलग-अलग एयरबेस से भारतीय और विदेशी विमान अभ्यास की निर्धारित गतिविधियों में हिस्सा लेंगे। इससे बड़े क्षेत्र में संयुक्त प्रशिक्षण और हवाई अभियानों के समन्वय का अभ्यास किया जा सकेगा।

‘तरंग शक्ति’ जैसे बहुराष्ट्रीय अभ्यास भारत के लिए दूसरे देशों की वायु सेनाओं के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाने का एक माध्यम भी हैं। अलग-अलग देशों के पायलट और तकनीकी दल एक साथ अभ्यास करते हैं, जिससे उन्हें एक-दूसरे के विमानों, संचालन प्रक्रियाओं और मिशन प्लानिंग को समझने का अवसर मिलता है।जोधपुर में शुरू हुए इस अभ्यास के दौरान अगले कुछ दिनों तक आसमान में राफेल, तेजस, सुखोई-30 MKI, F-35 और F-16 जैसे विमानों की गतिविधियां देखने को मिलेंगी। 12 अक्टूबर तक चलने वाले इस युद्धाभ्यास पर सैन्य और रक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों की नजर रहेगी।

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