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जोधपुर में NRI से 5.5 करोड़ की ठगी, वीडियो में देंखे 3 साल बाद भी पूरी रिकवरी नहीं; जांच की गति पर सवाल

जोधपुर में NRI से 5.5 करोड़ की ठगी, वीडियो में देंखे 3 साल बाद भी पूरी रिकवरी नहीं; जांच की गति पर सवाल

राजस्थान के जोधपुर में एक एनआरआई के साथ हुए बड़े वित्तीय घोटाले का मामला सामने आया है, जिसमें करीब साढ़े 5 करोड़ रुपये की ठगी के बावजूद पुलिस अब तक पूरी राशि रिकवर नहीं कर पाई है। यह मामला तीन साल पुराना है, लेकिन अब भी जांच और रिकवरी की प्रक्रिया अधूरी बनी हुई है।पीड़ित एनआरआई Krishna Kumar Mehta ने 14 अगस्त 2023 को जोधपुर के साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बैंक खातों से सुनियोजित तरीके से बड़ी रकम निकाली गई और उसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।

जानकारी के अनुसार, इस पूरे घोटाले को एक अकाउंटेंट ने अंजाम दिया था, जो पीड़ित के वित्तीय लेनदेन से जुड़ा हुआ था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन इसके बावजूद अब तक केवल लगभग 1.45 करोड़ रुपये ही रिकवर हो पाए हैं, जबकि शेष राशि की वसूली अभी भी लंबित है।यह धनराशि जयपुर फुट से जुड़े सलाहकार केके मेहता द्वारा गरीबों की सहायता के लिए एकत्रित की गई थी, जिससे इस मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है। आरोप है कि जांच की धीमी गति का फायदा उठाकर आरोपी ने कई महत्वपूर्ण सबूतों को नष्ट करने की कोशिश की।

मामले में जांच की धीमी प्रगति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। परिजनों और संबंधित पक्षों का आरोप है कि यदि जांच समय पर और तेजी से की जाती, तो अधिक राशि की रिकवरी संभव थी और सबूतों को नष्ट होने से बचाया जा सकता था।पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामला साइबर फ्रॉड और वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है, जिसमें बैंकिंग ट्रांजैक्शन और डिजिटल फंड ट्रेल की गहन जांच की जा रही है। हालांकि, फंड कई खातों में ट्रांसफर होने के कारण रिकवरी प्रक्रिया जटिल बनी हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में धनराशि को विभिन्न खातों और लेयरों में घुमा दिया जाता है, जिससे ट्रेसिंग और रिकवरी मुश्किल हो जाती है। इसके बावजूद, समय पर कार्रवाई से बड़ी राशि को सुरक्षित किया जा सकता था।फिलहाल, Jodhpur Cyber Police इस मामले की जांच को आगे बढ़ा रही है और शेष राशि की रिकवरी के लिए बैंकिंग चैनलों के साथ समन्वय किया जा रहा है। यह मामला एक बार फिर साइबर और वित्तीय सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है, खासकर तब जब बड़े लेनदेन और ट्रस्ट फंड जैसी संवेदनशील रकम शामिल हो।

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