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साध्वी प्रेम बाईसा की मौत पर जांच में नया मोड़, इंजेक्शन के 20 मिनट बाद निधन से उठे सवाल

राजस्थान में साध्वी प्रेम बाईसा की मौत का मामला अब नया मोड़ लेता नजर आ रहा है। शुरुआती जांच में उनकी मौत का कारण अस्थमा अटैक और कार्डियक अरेस्ट माना गया है, लेकिन मौत से करीब 20 मिनट पहले लगाए गए इंजेक्शन ने पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस खुलासे के बाद जांच एजेंसियां अब हर पहलू को गंभीरता से खंगाल रही हैं।  जानकारी के अनुसार, साध्वी प्रेम बाईसा की तबीयत अचानक खराब होने के बाद उन्हें उपचार दिया गया था। इसी दौरान उन्हें एक इंजेक्शन लगाया गया, जिसके करीब 20 मिनट बाद उनकी मौत हो गई। इस घटनाक्रम ने परिजनों और अनुयायियों के मन में कई शंकाएं पैदा कर दी हैं। उनका कहना है कि इंजेक्शन लगाए जाने के तुरंत बाद उनकी हालत और बिगड़ गई, जिससे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।  प्रारंभिक मेडिकल रिपोर्ट में अस्थमा और कार्डियक अरेस्ट को मौत का कारण बताया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि गंभीर अस्थमा अटैक की स्थिति में हार्ट पर अचानक दबाव पड़ सकता है, जिससे कार्डियक अरेस्ट की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि इंजेक्शन और मौत के बीच कम समय का अंतर जांच का महत्वपूर्ण बिंदु बन गया है।  मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों ने मेडिकल प्रक्रिया, दवाइयों और इंजेक्शन के प्रकार की विस्तृत जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। यह भी जांच की जा रही है कि इंजेक्शन किस डॉक्टर या मेडिकल स्टाफ ने लगाया और क्या वह निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार दिया गया था या नहीं।  साध्वी प्रेम बाईसा के अनुयायियों में उनकी मौत को लेकर गहरा दुख और आक्रोश है। कई लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम को संदिग्ध बताते हुए सच्चाई सामने लाने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक पूरी जांच नहीं हो जाती, तब तक मौत के असली कारणों को लेकर संदेह बना रहेगा।  वहीं प्रशासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जा रही है। मेडिकल रिपोर्ट, पोस्टमार्टम और घटनास्थल से जुड़े सभी तथ्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर मेडिकल एक्सपर्ट्स की राय भी ली जाएगी, ताकि किसी भी तरह की लापरवाही या चूक सामने आ सके।  इस घटना के बाद स्वास्थ्य सेवाओं और इलाज की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी गंभीर मरीज को इंजेक्शन देने से पहले सभी जरूरी सावधानियां और जांच जरूरी होती है।  फिलहाल साध्वी प्रेम बाईसा की मौत का मामला जांच के दायरे में है और सभी की नजर अब जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह केवल मेडिकल इमरजेंसी थी या इसके पीछे कोई और कारण भी जिम्मेदार था।

राजस्थान में साध्वी प्रेम बाईसा की मौत का मामला अब नया मोड़ लेता नजर आ रहा है। शुरुआती जांच में उनकी मौत का कारण अस्थमा अटैक और कार्डियक अरेस्ट माना गया है, लेकिन मौत से करीब 20 मिनट पहले लगाए गए इंजेक्शन ने पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस खुलासे के बाद जांच एजेंसियां अब हर पहलू को गंभीरता से खंगाल रही हैं।

जानकारी के अनुसार, साध्वी प्रेम बाईसा की तबीयत अचानक खराब होने के बाद उन्हें उपचार दिया गया था। इसी दौरान उन्हें एक इंजेक्शन लगाया गया, जिसके करीब 20 मिनट बाद उनकी मौत हो गई। इस घटनाक्रम ने परिजनों और अनुयायियों के मन में कई शंकाएं पैदा कर दी हैं। उनका कहना है कि इंजेक्शन लगाए जाने के तुरंत बाद उनकी हालत और बिगड़ गई, जिससे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।

प्रारंभिक मेडिकल रिपोर्ट में अस्थमा और कार्डियक अरेस्ट को मौत का कारण बताया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि गंभीर अस्थमा अटैक की स्थिति में हार्ट पर अचानक दबाव पड़ सकता है, जिससे कार्डियक अरेस्ट की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि इंजेक्शन और मौत के बीच कम समय का अंतर जांच का महत्वपूर्ण बिंदु बन गया है।

मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों ने मेडिकल प्रक्रिया, दवाइयों और इंजेक्शन के प्रकार की विस्तृत जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। यह भी जांच की जा रही है कि इंजेक्शन किस डॉक्टर या मेडिकल स्टाफ ने लगाया और क्या वह निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार दिया गया था या नहीं।

साध्वी प्रेम बाईसा के अनुयायियों में उनकी मौत को लेकर गहरा दुख और आक्रोश है। कई लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम को संदिग्ध बताते हुए सच्चाई सामने लाने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक पूरी जांच नहीं हो जाती, तब तक मौत के असली कारणों को लेकर संदेह बना रहेगा।

वहीं प्रशासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जा रही है। मेडिकल रिपोर्ट, पोस्टमार्टम और घटनास्थल से जुड़े सभी तथ्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर मेडिकल एक्सपर्ट्स की राय भी ली जाएगी, ताकि किसी भी तरह की लापरवाही या चूक सामने आ सके।

इस घटना के बाद स्वास्थ्य सेवाओं और इलाज की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी गंभीर मरीज को इंजेक्शन देने से पहले सभी जरूरी सावधानियां और जांच जरूरी होती है।

फिलहाल साध्वी प्रेम बाईसा की मौत का मामला जांच के दायरे में है और सभी की नजर अब जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह केवल मेडिकल इमरजेंसी थी या इसके पीछे कोई और कारण भी जिम्मेदार था।

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