शहर में धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सवों की रौनक बढ़ाने वाले शिव बारात महोत्सव समिति, सरदारपुरा प्रखंड की ओर से भगवान महादेव और पार्वती मैया की शादी धूमधाम से मनाई जाएगी। इस वर्ष के महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और आयोजकों ने रस्मों और कार्यक्रमों की रूपरेखा तय कर दी है।
शुक्रवार को हल्दी की रस्म संपन्न हुई, जबकि शनिवार को मेहंदी की रस्में आयोजित की गईं। इस अवसर पर पंडित राजेश दवे के नेतृत्व में भगवान महादेव के विवाह का सावा भी लिखा गया। आयोजकों ने बताया कि यह समारोह धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है।
मुख्य उत्सव 15 फरवरी की शाम 7 बजे से शुरू होगा। उस समय सत्संग भवन से बारात निकलेगी और अचलनाथ महादेव पहुंचकर विवाह का आयोजन संपन्न होगा। उत्सव में भव्य तोरण, पूजा और अन्य पारंपरिक रस्मों के साथ भगवान महादेव और जगतजननी पार्वती मैया का विवाह धूमधाम से मनाया जाएगा।
कार्यक्रम के अनुसार, देर रात लगभग 2 बजे भूतनाथ महादेव में भगवान के फेरे करवाए जाएंगे। यह आयोजन स्थानीय समाज और श्रद्धालुओं के लिए खास महत्व रखता है। शादी समारोह की सभी रस्मों और पूजा-पाठ के लिए विशेष तैयारी की गई है।
शिव बारात महोत्सव समिति के सदस्य बताते हैं कि इस वर्ष समारोह को और भव्य बनाने के लिए सजावट, मंच निर्माण, संगीत और पारंपरिक रीतियों पर विशेष ध्यान दिया गया है। स्थानीय श्रद्धालु और भगवान शिव भक्त इस अवसर पर भारी संख्या में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं।
आयोजकों ने कहा कि इस समारोह का उद्देश्य न केवल धार्मिक अनुष्ठान करना है, बल्कि संस्कृति, परंपरा और समुदाय को जोड़ने का भी है। समारोह में शामिल लोग पारंपरिक वेशभूषा और गीत-संगीत के माध्यम से उत्सव का आनंद लेंगे।
जोधपुर के मंदिरों और आसपास के क्षेत्रों में इस भव्य आयोजन की तैयारी को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिल रहा है। बारात और विवाह समारोह के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा। पुलिस और स्थानीय प्रशासन भी कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के सांस्कृतिक और धार्मिक उत्सव न केवल स्थानीय लोगों में उत्साह बढ़ाते हैं, बल्कि धार्मिक पर्यटन और सामाजिक समरसता को भी प्रोत्साहित करते हैं।
इस प्रकार, भगवान महादेव और पार्वती मैया की शादी 15 फरवरी को जोधपुर में भव्य रूप से संपन्न होगी। हल्दी और मेहंदी की रस्मों के बाद, बारात और फेरे के माध्यम से यह आयोजन पूरी तरह से परंपरागत विधि और धूमधाम के साथ मनाया जाएगा।

