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जीरे की रिकॉर्ड आवक के बीच मंडी का बड़ा फैसला, नीलामी सिस्टम में सख्त बदलाव लागू

जीरे की रिकॉर्ड आवक के बीच मंडी का बड़ा फैसला, नीलामी सिस्टम में सख्त बदलाव लागू

राजस्थान की कृषि उपज मंडियों में जीरे की रिकॉर्ड आवक के बीच प्रशासन ने नीलामी प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। एक अप्रैल से मंडियों में नीलामी सिस्टम में सख्त बदलाव लागू किए जाएंगे, जिससे अव्यवस्था पर लगाम लगाने की कोशिश की जा रही है।

नई व्यवस्था के तहत अब जीरे की नीलामी तय समय पर ही शुरू होगी और व्यापारियों को केवल 15 मिनट की निर्धारित विंडो में ही बोली प्रक्रिया में शामिल होने का मौका मिलेगा। निर्धारित समय के बाद आने वाले व्यापारियों को नीलामी में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यह नियम पहली बार लागू किया जा रहा है, जिसे लेकर मंडी में चर्चा का माहौल है।

मंडी प्रशासन का कहना है कि जीरे की बढ़ती आवक के चलते नीलामी में देरी, भीड़भाड़ और अव्यवस्था की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। कई बार बोली प्रक्रिया घंटों तक खिंच जाती थी, जिससे किसानों और व्यापारियों दोनों को परेशानी उठानी पड़ती थी। नई व्यवस्था से इस समस्या का समाधान होने की उम्मीद जताई जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार, समयबद्ध नीलामी से किसानों को अपनी उपज का जल्द मूल्य मिल सकेगा, वहीं व्यापारियों को भी स्पष्ट और व्यवस्थित प्रक्रिया का लाभ मिलेगा। इससे मंडी में पारदर्शिता बढ़ेगी और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या मनमानी पर रोक लगेगी।

हालांकि, कुछ व्यापारियों ने इस नए नियम को लेकर चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि 15 मिनट की समय सीमा काफी कम है, खासकर तब जब मंडी में भारी भीड़ होती है। ऐसे में थोड़ी सी देरी होने पर उन्हें नीलामी से बाहर होना पड़ सकता है।

वहीं किसानों का एक वर्ग इस फैसले का समर्थन कर रहा है। उनका मानना है कि इससे अनावश्यक देरी खत्म होगी और उन्हें अपनी फसल का उचित मूल्य समय पर मिल सकेगा।

मंडी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शुरुआत में इस व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाएगा, ताकि सभी संबंधित पक्ष समय का पालन करें। साथ ही, जरूरत पड़ने पर नियमों में सुधार भी किया जा सकता है।

कुल मिलाकर, जीरे की रिकॉर्ड आवक के बीच यह नया नीलामी सिस्टम मंडियों में अनुशासन और पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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