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जोधपुर में 7 दिन बाद पाइपलाइन लीकेज हुआ बंद, अब सेना के जवान निकालेंगे खेतों में बहा लाखों लीटर पानी

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राजस्थान के जोधपुर जिले में तख्त सागर से शहर को जलापूर्ति करने वाली पाइपलाइन में लीकेज आखिरकार 7 दिन बाद बंद हो गई है। जलदाय विभाग ने मंगलवार रात को इस रिसाव को रोकने में सफलता प्राप्त की। रिसाव को रोकने के लिए सेना के जवानों की मदद ली गई। उन्होंने लोहे की गेंदें और रेत की बोरियां डालकर पाइपलाइन का रिसाव बंद कर दिया। लेकिन पिछले 7 दिनों से जारी इस रिसाव के कारण आसपास के खेतों की करीब 85 बीघा जमीन में लाखों लीटर पानी जमा हो गया है। जिसके कारण किसानों की खेतों में खड़ी फसलें नष्ट हो गई हैं।

अब सेना के जवान मोटर पंपों का उपयोग करके खेतों में जमा पानी को बाहर निकाल रहे हैं। रिसाव के कारण आसपास के क्षेत्रों में जलापूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। स्थानीय लोगों को अपने घरों तक पानी पहुंचाने के लिए ऊंची दरों पर पानी मंगवाना पड़ रहा है। इस बीच, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा बुधवार को मामले की समीक्षा करेंगे।

जलदाय विभाग पर लापरवाही का आरोप
जोधपुर में इस लीकेज संकट के लिए जलदाय विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि लीकेज की सूचना मिलते ही जलदाय विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंच गए। लेकिन उन्होंने इस समस्या को हल्के में लिया, जिससे समस्या गंभीर हो गई। यह भी कहा जा रहा है कि ये पाइपलाइनें काफी पुरानी हैं, जिसके कारण इनकी मरम्मत में दिक्कतें आ रही हैं।

राजस्थान के पूर्व मंत्री और भाजपा के राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत ने कहा है कि यह पाइपलाइन आजादी से पहले की है, लेकिन जलदाय विभाग के अधिकारियों को इस पाइपलाइन के बारे में सही जानकारी नहीं थी और इस वजह से इसकी मरम्मत में परेशानी आ रही थी। इससे पहले जोधपुर के एडीएम जवाहर चौधरी ने कहा था कि लीकेज को मंगलवार रात तक ठीक कर दिया जाएगा, लेकिन पूरी व्यवस्था को ठीक करने में एक सप्ताह का समय लगेगा, क्योंकि इसके लिए पानी को डायवर्ट करना होगा और उसकी मरम्मत करनी होगी।

किसानों की फसलें जलमग्न हो गईं।
जल रिसाव के कारण आसपास के क्षेत्र के किसानों को नुकसान हुआ है तथा खेतों में उनकी फसलें नष्ट हो गई हैं। इसके बाद किसानों को मुआवजा देने की भी मांग की जा रही है। सांसद राजेंद्र गहलोत ने इस संबंध में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखा है। माना जा रहा है कि बुधवार को होने वाली समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री इस पर विचार कर सकते हैं।

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