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झुंझुनूं में दहेज प्रथा के खिलाफ मिसाल: दूल्हे के पिता ने 21 लाख रुपये लौटाकर दिया संदेश

झुंझुनूं में दहेज प्रथा के खिलाफ मिसाल: दूल्हे के पिता ने 21 लाख रुपये लौटाकर दिया संदेश

राजस्थान के शेखावाटी अंचल में पारंपरिक शादियों को अक्सर भव्य खर्च और दहेज प्रथा के लिए जाना जाता है। लेकिन हाल ही में झुंझुनूं जिले के चिड़ावा क्षेत्र में एक विवाह ने सामाजिक चेतना की नई मिसाल कायम की है। चिड़ावा शहर निवासी दूल्हे अखिल लामोरिया के पिता और ताऊजी ने 21 लाख रुपये नकद शगुन सम्मानपूर्वक लौटाकर दहेज प्रथा के खिलाफ सशक्त संदेश दिया।

यह विवाह 21 फरवरी को साहवा (जिला चूरू) निवासी ज्योति के साथ संपन्न हुआ। इस समारोह में दहेज के प्रतीक के रूप में केवल एक रुपया और नारियल स्वीकार किया गया, जो दूल्हा पक्ष की स्पष्ट नीतिगत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस कदम को स्थानीय समाज और मीडिया में काफी सराहा जा रहा है, क्योंकि यह परंपरागत रीति-रिवाजों में बदलाव और दहेज प्रथा के खिलाफ समाज में जागरूकता फैलाने का प्रतीक बन गया है।

दूल्हे के पिता और ताऊजी ने बताया कि वे चाहते हैं कि उनका बेटा और उसकी पत्नी एक समान और सम्मानजनक जीवन बिताएं, जिसमें विवाह का मूल उद्देश्य केवल प्रेम, सहयोग और पारिवारिक संबंध हों, न कि आर्थिक लेन-देन। उन्होंने स्पष्ट किया कि दहेज जैसी कुप्रथा समाज में महिलाओं के सम्मान और उनकी स्वतंत्रता के लिए खतरा है।

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और महिला संगठनों ने भी इस कदम की सराहना की है। उनका कहना है कि इस तरह के उदाहरण समाज में बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे मानते हैं कि जब बड़े परिवार और समाज के प्रतिष्ठित लोग इस तरह की पहल करते हैं, तो अन्य परिवारों को भी दहेज प्रथा छोड़ने और विवाह को सरल और सम्मानजनक बनाने की प्रेरणा मिलती है।

शेखावाटी क्षेत्र में पारंपरिक शादियों में अक्सर दहेज, भव्य महफिल और भव्य उपहारों का चलन होता है। लेकिन यह विवाह दिखाता है कि आर्थिक भार को कम करते हुए भी विवाह का सामाजिक और पारिवारिक महत्व बरकरार रखा जा सकता है। इस पहल से यह संदेश भी जाता है कि विवाह केवल दो परिवारों के बीच संबंध बनाने का अवसर होना चाहिए, न कि आर्थिक प्रतिस्पर्धा का मंच।

विवाह में शामिल लोग और परिवार ने यह भी कहा कि वे उम्मीद करते हैं कि यह कदम युवा पीढ़ी के लिए उदाहरण बने और अन्य परिवार भी दहेज प्रथा के खिलाफ अपने तरीके अपनाएं। स्थानीय प्रशासन और समाजिक संस्थानों ने भी इस विवाह को सार्वजनिक रूप से सराहा और इसे सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में एक प्रेरक घटना बताया।

इस पहल ने झुंझुनूं जिले और पूरे शेखावाटी अंचल में यह संदेश फैलाया है कि विवाह का मतलब केवल रस्मों और खर्चों से नहीं है, बल्कि यह सामाजिक चेतना और मूल्यों का प्रतीक होना चाहिए। अखिल लामोरिया और ज्योति का यह विवाह एक नई सोच, सामाजिक जिम्मेदारी और समानता के सिद्धांत को दर्शाता है।

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