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Jhansi  शहर में अवैध कॉलोनी और भूखण्डों का जाल, न करें खरीदारी, सेल-टू एग्रीमेंट कर भूस्वामी से करवाते रजिस्ट्री
 

Jhansi  शहर में अवैध कॉलोनी और भूखण्डों का जाल, न करें खरीदारी, सेल-टू एग्रीमेंट कर भूस्वामी से करवाते रजिस्ट्री

उत्तरप्रदेश न्यूज़ डेस्क  खुद मोटी कमायी करके कालोनीवासियों को भूलभूत सुविधाएं के लिए रुलाने वाले कालोनाइजरों से जनपदवासियों को सदर उपजिलाधिकारी मोहम्मद अवेश खान ने विज्ञप्ति जारी कर कालोनियों में भूखण्ड नहीं खरीदने की सलाह देने के साथ ही खरीदारी करने वालों को परिणाम भुगतने की हिदायत भी दी.

विनियमित क्षेत्र प्राधिकरण की ओर जारी पत्र में उल्लेखित किया गया है कि शहर से लगे ग्राम पनारी स्थित गाटा संख्या 1460, 1574/2, 1588/2, 1576/1, 132, 176, 175, 173, 205/2, 205/3, 205/1, 671,669, 664, 663, 561/3, 557, 558, 565 पर अवैध कालोनी वितरित हो चुकी हैं. प्लाटिंग का काम तेजी के साथ चल रहा है. इसके अलावा देवगढ़ रोड बच्चा जेल के पास गाटा संख्या 743, 744, 749/2, व गाटा संख्या 740, 962, 1198 पर प्लाटिंग हो रही है. उक्त भूमि पर अवैध ढंग से मकानों का भी निर्माण हो चुका है. वहीं ग्राम जुगपुरा में शिवलोक कालोनी, ग्राम पटौराकलां में साईंनाथ कालोनी, ग्राम महेशपुरा में भी माफिया अवैध कालोनियां वितरित कर रहे हैं. इन कालोनियों में भवन उपविधि 2018 के अनुसार सड़क, जलनिकासी, पेयजल, पार्क, मार्ग प्रकाश आदि सुविधाएं नहीं हैं. कालोनी विकसित करने वाले व्यक्ति पहले तलपट मानचित्र (ले-आऊट) पास करवा लें. अन्यथा की स्थिति में आरओबी एक्ट के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई होगी. विनियमित क्षेत्र प्राधिकरण अधिकारियों ने उक्त कालोनियों में भू-खण्ड नहीं खरीदने की सलाह जनपदवासियों को दी है. और कहा कि यदि फिर भी लोग खरीदारी करते हैं तो उनको कार्रवाई के लिए तैयार रहना होगा. विनियमित क्षेत्र प्राधिकरण अफसरों की अपील से माफिया में खलबली मच गयी है.
माफिया
व्यक्ति बच्चों की पढ़ाई लिखाई आदि के लिए शहर में एक छोटा सा मकान बनाना चाहते हैं. उनकी इसी मंशा को भांपते हुए से भू-माफिया वर्षों से सक्रिय हैं. वह किसानों की जमीनों को एकड़ के भाव में खरीदकर फिर उसको प्लाटिंग का रूप देकर भूखण्ड जरूरतमंदों को विक्रय करते हैं. नियमानुसार जमीन पर प्लाटिंग करने से पहले विनियमित क्षेत्र प्राधिकरण से बाकायदा ले-आऊट पास कराना आवश्यक है, जिससे खरीददार को चौड़ी सड़कें, नालियां, मार्ग प्रकाश, पेयजल आपूर्ति, पार्क आदि सुविधाएं कालोनी में मिल सकें. लेकिन, भू-माफिया इन सुविधाओं पर खर्च होने वाली धनराशि व ले-आऊट की विभागीय फीस आदि को मुनाफा मानकर हजम कर जाता है.
प्लाटिंग के कारोबार में भू-माफिया का अन्दाज बेहद खतरनाक रहता है. वह जमीन के कुल मूल्य का कुछ हिस्सा देकर भूस्वामी से निर्धारित समय के लिए सेल टू एग्रामीमेंट करता हैं. प्लाटिंग के पश्चात भूखंडों की रजिस्ट्री भूस्वामी से ही करायी जाती है. इस तरह उनको भूमि का पूरा मूल्य चुकाने के साथ ही बिना कागजों में आए मुनाफा कमाकर माफिया किनारे हट जाता है.


झाँसी  न्यूज़ डेस्क

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