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झालावाड़ में फूलों की खेती बनी किसानों की नई पहचान, पारंपरिक खेती से बढ़ी आय और बदल रही तस्वीर

झालावाड़ में फूलों की खेती बनी किसानों की नई पहचान, पारंपरिक खेती से बढ़ी आय और बदल रही तस्वीर

राजस्थान के झालावाड़ जिले में किसान अब पारंपरिक खेती से हटकर फूलों की खेती की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। इस बदलाव ने न केवल कृषि के स्वरूप को बदला है, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार की नई राह खोली है।

जिले में पहले गंगानगरी गुलाब की खेती से शुरुआत हुई थी, जो अब नवरंगा, गेंदा और गुलदाउदी जैसे विभिन्न फूलों की खेती तक पहुंच गई है। फूलों की बढ़ती मांग के चलते किसान इसे एक लाभकारी विकल्प के रूप में अपना रहे हैं।

किसानों का कहना है कि फूलों की खेती से उन्हें पारंपरिक फसलों की तुलना में अधिक मुनाफा मिल रहा है। इसके चलते उनकी आय में वृद्धि हुई है और जीवन स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।

विशेषज्ञों के अनुसार, झालावाड़ क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी फूलों की खेती के लिए अनुकूल है, जिससे यहां इस प्रकार की कृषि गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। स्थानीय बाजारों के साथ-साथ बाहरी राज्यों में भी इन फूलों की अच्छी मांग है।

फूलों की खेती ने न केवल किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत किया है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं। इससे कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा मिल रही है।

कृषि विभाग की ओर से भी किसानों को फूलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार हो सके।

फिलहाल झालावाड़ के किसान इस नई कृषि दिशा को अपनाकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं और इसे भविष्य की एक मजबूत फसल रणनीति के रूप में देख रहे हैं।

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