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Jamshedpur अनदेखी कमजोर जनजातियों के पास जमीन न खतियान
 

Jamshedpur अनदेखी कमजोर जनजातियों के पास जमीन न खतियान

झारखण्ड न्यूज़ डेस्क, झारखंड की कुल आठ अति कमजोर जनजातियों (पहले आदिम जनजातियां कहलाती थीं) के अंतर्गत आनेवाली बिरहोर जनजाति को ना तो खतियान की समझ है और ना ही आरक्षण. इन्हें केवल मालूम है तो बस इतना ही कि इनसे जंगलों का अधिकार छीन लिया गया है. इन्हें जंगलों से निकालकर जंगलों के किनारे वैसी जमीन जिसे यह नैसर्गिक रूप से अपना मानते थे, उसी में इन्हें बसाया गया और कहा गया कि यह सरकार की जमीन है. इनके बीच कुछ बुजुर्गों को तो यह भी नहीं मालूम कि सरकार क्या होती है. उसका तंत्र क्या होता है, उन्हें केवल मालूम है तो इतना ही कि भूख लगती है और भूख मिटाने के लिए भोजन चाहिए.

यही स्थिति झारखंड में निवास करने वाली अति कमजोर जनजाति सबर की है, जिनकी आबादी 9688 है. इनमें 8117 पूर्वी सिंहभूम में निवास करती है. घोर कुपोषण और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे इन अति कमजोर जनजातियों के पास भी जमीन नहीं है. जंगलों और पहाड़ियों की तलहटी में बसने वाली यह जनजाति आज भी जंगलों पर निर्भर करती है. जंगलों से सूखी लकड़ी के साथ लघु वनोत्पाद संग्रह कर जीवन यापन करने वाली इन जनजातियों को भी ना तो खतियान की बात समझ में आती है और ना ही लोकतंत्र में वोट की राजनीति.

जमशेदपुर न्यूज़ डेस्क !!!
 

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