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जालोर में लेक्चररों की कमी से नाराज छात्रों ने स्कूल गेट पर लगाया ताला, वीडियो में देखें अभिभावकों के साथ सड़क पर किया प्रदर्शन

जालोर में लेक्चररों की कमी से नाराज छात्रों ने स्कूल गेट पर लगाया ताला, वीडियो में देखें अभिभावकों के साथ सड़क पर किया प्रदर्शन

राजस्थान के जालोर जिले में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। आहोर थाना क्षेत्र के सराणा गांव स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में लेक्चररों की कमी से परेशान छात्रों ने सोमवार को स्कूल के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया और सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों के साथ उनके अभिभावक भी मौजूद रहे। प्रदर्शन के चलते कुछ समय के लिए इलाके में तनाव की स्थिति बन गई।

जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह छात्र रोज की तरह स्कूल पहुंचे, लेकिन लंबे समय से चली आ रही व्याख्याताओं की कमी को लेकर उनका सब्र जवाब दे गया। छात्रों और अभिभावकों ने आरोप लगाया कि स्कूल में कई विषयों के लेक्चरर के पद खाली पड़े हैं, जिससे पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। खासतौर पर 9वीं से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को इसका सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है।

अभिभावकों ने बताया कि बोर्ड और अन्य परीक्षाएं नजदीक हैं, लेकिन लेक्चरर नहीं होने की वजह से बच्चों की पढ़ाई नियमित रूप से नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि स्कूल में सिर्फ 8 शिक्षक कार्यरत हैं, जो मुख्य रूप से निचली कक्षाओं को पढ़ा रहे हैं। उच्च कक्षाओं के लिए एक भी व्याख्याता नियुक्त नहीं है, ऐसे में छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ता नजर आ रहा है।

छात्रों का कहना है कि वे लंबे समय से इस समस्या को लेकर स्कूल प्रशासन और शिक्षा विभाग को अवगत करा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। मजबूर होकर उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। छात्रों ने स्कूल गेट पर ताला लगाकर नारेबाजी की और सड़क पर बैठकर विरोध जताया। प्रदर्शन के कारण कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ।

विरोध प्रदर्शन की सूचना मिलने पर शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने छात्रों और अभिभावकों से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जल्द ही स्कूल में व्याख्याताओं की नियुक्ति की जाएगी और अस्थायी व्यवस्था के तहत वैकल्पिक समाधान भी किया जाएगा, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

अधिकारियों के आश्वासन के बाद छात्रों और अभिभावकों ने प्रदर्शन समाप्त किया और स्कूल का ताला खोला गया। हालांकि, छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही लेक्चररों की नियुक्ति नहीं की गई, तो वे दोबारा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

यह मामला एक बार फिर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर करता है। अभिभावकों का कहना है कि सरकार एक ओर शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्कूलों में जरूरी स्टाफ तक उपलब्ध नहीं है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन अपने आश्वासन पर कितना अमल करता है और छात्रों को कब तक राहत मिलती है।

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