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वीडियो में देंखे जैसलमेर में दुर्लभ कैरेकल बिल्ली पर स्टडी, कैमरे में पहली बार दिखा पूरा कुनबा

वीडियो में देंखे जैसलमेर में दुर्लभ कैरेकल बिल्ली पर स्टडी, कैमरे में पहली बार दिखा पूरा कुनबा

राजस्थान के जैसलमेर जिले में दुर्लभ वन्यजीव कैरेकल बिल्ली को लेकर बड़ी सफलता सामने आई है। Wildlife Institute of India (वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया) द्वारा किए जा रहे अध्ययन के दौरान घोटारू इलाके में कैरेकल का पूरा कुनबा कैमरे में कैद हुआ है।

वन विभाग ने करीब सात दिन पहले एक कैरेकल पर रेडियो कॉलर और मोशन सेंसिंग कैमरा लगाया था। इसके बाद मिले फुटेज में कैरेकल के परिवार की तस्वीरें सामने आई हैं, जो इस प्रजाति के संरक्षण के लिए बेहद अहम मानी जा रही हैं। इस रिकॉर्डिंग के आधार पर अब जैसलमेर में आधिकारिक तौर पर तीन कैरेकल होने की पुष्टि हुई है।

कैरेकल एक बेहद दुर्लभ और तेजी से घटती संख्या वाली जंगली बिल्ली है, जिसे दुनिया में विलुप्त होने की कगार पर माना जाता है। भारत में इसकी मौजूदगी बहुत सीमित क्षेत्रों तक ही सिमटी हुई है, खासतौर पर पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस तरह का वीडियो और डेटा मिलना संरक्षण प्रयासों के लिए बड़ी उपलब्धि है। इससे कैरेकल के आवास, व्यवहार और गतिविधियों को समझने में मदद मिलेगी। अधिकारी अब इस इलाके में निगरानी और सुरक्षा को और मजबूत करने की योजना बना रहे हैं।

हालांकि, इस सफलता के पीछे एक दुखद पृष्ठभूमि भी जुड़ी है। कुछ समय पहले जैसलमेर में ही दो युवकों ने एक कैरेकल को मारकर जला दिया था, जिससे वन्यजीव संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। इस घटना के बाद वन विभाग ने जागरूकता अभियान तेज कर दिए हैं और स्थानीय लोगों को समझाया जा रहा है कि इस दुर्लभ प्रजाति को नुकसान पहुंचाना एक बड़ा अपराध है।

वन विभाग अब लगातार कैरेकल के संरक्षण के लिए काम कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय समुदाय का सहयोग इस दिशा में बेहद जरूरी है। लोगों को यह बताया जा रहा है कि कैरेकल न केवल पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है, बल्कि इसकी मौजूदगी क्षेत्र की जैव विविधता को भी दर्शाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते संरक्षण के प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह प्रजाति भारत से पूरी तरह खत्म हो सकती है। ऐसे में जैसलमेर में कैरेकल के कुनबे का कैमरे में कैद होना एक सकारात्मक संकेत है और इससे उम्मीद जगी है कि सही प्रयासों से इस प्रजाति को बचाया जा सकता है।

इस तरह, जैसलमेर में कैरेकल पर हो रही यह स्टडी न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण के लिए भी एक बड़ा कदम साबित हो रही है। अब वन विभाग और शोध संस्थान मिलकर इस दुर्लभ प्रजाति को बचाने के लिए और ठोस रणनीति पर काम कर रहे हैं।

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