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पोखरण में ‘वायु अस्त्र-1’ का सफल परीक्षण, दो मिनट के वीडियो में देंखे डेढ़ घंटे तक दुश्मन पर नजर रखकर कर सकता है हमला

प्रदेश में पंचायत-निकाय चुनाव दिसंबर तक टालने के सरकार और राज्य चुनाव आयोग के प्रार्थना पत्र पर आज हाईकोर्ट अपना फैसला सुनाएगा। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा की खंडपीठ ने 11 मई को सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला रिजर्व कर लिया था। इसके बाद आज दोपहर 12 बजे अदालत अपना फैसला सुनाएगी। इस फैसले से साफ होगा कि सरकार को प्रदेश में चुनाव कराने के लिए कितना समय दिया जाता है। दरअसल, राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को 439 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को प्रदेश में 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन सरकार ने तय समय सीमा में चुनाव नहीं कराए और हाईकोर्ट में चुनाव टालने का प्रार्थना पत्र लगा दिया।

Pokhran की फील्ड फायरिंग रेंज में भारत ने आधुनिक रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। स्वदेशी आत्मघाती ड्रोन “वायु अस्त्र-1” का सफल परीक्षण किया गया है। यह अत्याधुनिक ड्रोन दुश्मन के इलाके में करीब डेढ़ घंटे तक उड़ान भरते हुए टारगेट पर नजर रख सकता है और हलचल मिलते ही सटीक हमला करने में सक्षम है।

इस ड्रोन का परीक्षण पुणे स्थित निजी डिफेंस टेक्नोलॉजी कंपनी Nibe Limited द्वारा विकसित लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम के तहत किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, “वायु अस्त्र-1” का पहला सफल टेस्ट राजस्थान के पोखरण में 18 अप्रैल 2026 को और उत्तराखंड के जोशीमठ क्षेत्र में 19 अप्रैल 2026 को किया गया।

खास बात यह है कि यह ड्रोन केवल हमला करने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर इसका टारगेट बदला भी जा सकता है। यदि ऑपरेशन के दौरान स्थिति बदलती है, तो हमले को रोका भी जा सकता है। यही क्षमता इसे पारंपरिक ड्रोन सिस्टम से अलग और अधिक प्रभावी बनाती है।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, “वायु अस्त्र-1” पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है और इसे आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह ड्रोन दुश्मन के इलाके में लंबे समय तक मंडराते हुए निगरानी कर सकता है और सही समय आने पर सटीक वार करता है। इस तरह के लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम को आधुनिक युद्ध में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

जानकारी के अनुसार, ड्रोन में एडवांस नेविगेशन और रियल टाइम कंट्रोल सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। इसकी मदद से ऑपरेटर दूर बैठकर भी मिशन को नियंत्रित कर सकते हैं। युद्ध जैसी परिस्थितियों में यह तकनीक सेना के लिए बड़ा सामरिक लाभ साबित हो सकती है।

भारत पिछले कुछ वर्षों में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर लगातार जोर दे रहा है। “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा उपकरणों के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। ऐसे में “वायु अस्त्र-1” का सफल परीक्षण भारतीय रक्षा उद्योग के लिए अहम उपलब्धि माना जा रहा है।

रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन और स्वायत्त हथियार प्रणालियों की भूमिका तेजी से बढ़ने वाली है। ऐसे में भारत का इस तकनीक में तेजी से आगे बढ़ना सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।

फिलहाल, “वायु अस्त्र-1” के सफल परीक्षण ने यह संकेत दे दिया है कि भारत अब आधुनिक ड्रोन युद्ध तकनीक में भी तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है और आने वाले समय में सेना को और अधिक उन्नत स्वदेशी हथियार प्रणालियां मिल सकती हैं।

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