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जैसलमेर बॉर्डर के 30 गांवों की बदलेगी तस्वीर: फुटेज में जाने सड़क, 4G और स्मार्ट सुविधाओं से होगा विकास

जैसलमेर बॉर्डर के 30 गांवों की बदलेगी तस्वीर: फुटेज में जाने सड़क, 4G और स्मार्ट सुविधाओं से होगा विकास

जैसलमेर में भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे 30 गांवों की तस्वीर अब बदलने जा रही है। केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत इन सीमावर्ती गांवों में बड़े स्तर पर विकास कार्य किए जाएंगे। योजना का उद्देश्य बॉर्डर क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है।पहले चरण में राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों के 123 गांवों के लिए करीब 515 करोड़ रुपए के विकास कार्यों को मंजूरी दी गई है। इनमें जैसलमेर जिले के 30 गांव भी शामिल हैं।

योजना के तहत हर चयनित गांव में प्रति वर्ष लगभग 3 करोड़ रुपए तक के विकास कार्य कराए जाएंगे। इन गांवों में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत किया जाएगा।सरकार का फोकस खासतौर पर डिजिटल और बुनियादी ढांचे के विस्तार पर रहेगा। गांवों में 4G नेटवर्क की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर इंटरनेट और संचार सेवाएं मिल सकेंगी। इसके अलावा गांवों को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ने का काम भी किया जाएगा।

शिक्षा क्षेत्र में स्मार्ट क्लासरूम विकसित किए जाएंगे, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को आधुनिक शिक्षा सुविधाएं मिल सकें। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के तहत मेडिकल सुविधाओं को भी मजबूत किया जाएगा।सरकार पर्यटन आधारित रोजगार को बढ़ावा देने की भी तैयारी कर रही है। जैसलमेर के सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन की संभावनाओं को देखते हुए स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार किए जाएंगे। इससे गांवों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना से सीमावर्ती गांवोंमें पलायन कम होगा और लोगों का जीवन स्तर बेहतर बनेगा। साथ ही सीमा क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से रणनीतिक दृष्टि से भी फायदा मिलेगा। स्थानीय लोगों ने इस योजना का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे लंबे समय से विकास की राह देख रहे गांवों को नई पहचान मिलेगी।

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