Samachar Nama
×

जैसलमेर में 'टीम ओरण' का पैदल मार्च, गोचर भूमि और पर्यावरण संरक्षण को लेकर किया जोरदार प्रदर्शन

जैसलमेर में 'टीम ओरण' का पैदल मार्च, गोचर भूमि और पर्यावरण संरक्षण को लेकर किया जोरदार प्रदर्शन

राजस्थान के जैसलमेर जिले में पर्यावरण और पारंपरिक सामुदायिक भूमि के संरक्षण को लेकर 'टीम ओरण' लगातार पैदल मार्च कर रही है। इस मार्च का उद्देश्य मुख्य रूप से गोचर भूमि, तालाब और अन्य पारंपरिक सामुदायिक भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराने की मांग को प्रशासन तक पहुंचाना है।

सूत्रों के अनुसार, बुधवार को यह मार्च जैसलमेर जिले के लाठी क्षेत्र तक पहुंचा। इस दौरान समाज के सभी वर्गों के सैकड़ों लोगों ने मार्च करने वालों का भव्य स्वागत किया। लोगों ने उन्हें माला पहनाकर और फूल बरसाकर सम्मानित किया। स्थानीय नागरिकों ने कहा कि यह पहल न केवल भूमि और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि इसे देखकर ग्रामीण समुदाय में जागरूकता और सक्रिय भागीदारी भी बढ़ रही है।

'टीम ओरण' का यह मार्च ओरण, तालाब और कैचमेंट क्षेत्र के संरक्षण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर केंद्रित है। टीम के सदस्य बता रहे हैं कि पारंपरिक सामुदायिक भूमि का संरक्षण केवल पर्यावरण के लिए नहीं, बल्कि स्थानीय किसान, पशुपालक और ग्रामीण समुदाय की आजीविका के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनकी मांग है कि इन भूमि संसाधनों को राजस्व रिकॉर्ड में स्थायी रूप से दर्ज किया जाए, ताकि भविष्य में उनका अवैध दोहन न हो।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि राजस्थान के शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में ओरण भूमि और तालाबों का संरक्षण जल संकट से लड़ने और पारंपरिक कृषि प्रणाली को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गोचर भूमि की सुरक्षा से पशुपालकों को चारागाह सुनिश्चित होता है और समुदाय के पारंपरिक संसाधनों पर भरोसा बना रहता है।

टीम ओरण के नेतृत्व में चल रहे इस मार्च में युवाओं, ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भारी भागीदारी देखी गई। मार्च के दौरान टीम ने विभिन्न स्थलों पर समुदाय के साथ संवाद किया और लोगों को पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक भूमि के महत्व के बारे में जागरूक किया।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के आंदोलनों का सबसे बड़ा असर यह होता है कि स्थानीय प्रशासन और सरकारी अधिकारी भी सक्रिय हो जाते हैं और पारंपरिक भूमि और पर्यावरण संरक्षण के मामलों में सख्त कार्रवाई करने के लिए प्रेरित होते हैं।

जैसलमेर जिले में टीम ओरण का यह पैदल मार्च न केवल स्थानीय मुद्दों को उजागर करने का माध्यम बन रहा है, बल्कि यह पूरे राजस्थान के ग्रामीण समुदायों के लिए प्रेरणास्त्रोत भी बन रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस तरह की पहल राज्यभर में की जाए, तो सांस्कृतिक, पारंपरिक और पर्यावरणीय संसाधनों के संरक्षण में महत्वपूर्ण बदलाव लाया जा सकता है।

इस मार्च के माध्यम से टीम ओरण ने यह संदेश दिया कि सामुदायिक भागीदारी, जागरूकता और शांतिपूर्ण आंदोलन से भी पारंपरिक संसाधनों की रक्षा की जा सकती है। स्थानीय लोग और पर्यावरण कार्यकर्ता आश्वस्त हैं कि इस पहल से राजस्व रिकॉर्ड में गोचर और ओरण भूमि को दर्ज करने की दिशा में निश्चित कदम उठाए जाएंगे।

इस प्रकार, जैसलमेर में टीम ओरण का यह पैदल मार्च पर्यावरण संरक्षण, पारंपरिक भूमि संरक्षण और सामाजिक जागरूकता का जीवंत उदाहरण बन गया है।

Share this story

Tags