रेगिस्तान में पानी की नई उम्मीद, फुटेज में देखें जैसलमेर के पोकरण में पहली बार मिले 64 जल स्रोत
राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक खुशखबरी सामने आई है। लंबे समय से सूखे और जल संकट से जूझ रहे जैसलमेर जिले के पोकरण क्षेत्र में पहली बार जमीन के नीचे पानी के नए ठिकाने मिलने का दावा किया गया है। यह खोज न केवल पोकरण बल्कि आसपास के सैकड़ों गांवों और ढाणियों के लिए राहत की बड़ी उम्मीद लेकर आई है। खास बात यह है कि जिन इलाकों में पानी मिलने की पुष्टि हुई है, उनमें से कई गांव-ढाणी ऐसे हैं, जहां अब तक कभी भी भूजल उपलब्ध नहीं माना जाता था।
दरअसल, साल 2021-22 में जैसलमेर के पोकरण क्षेत्र में हेलिबॉर्न सर्वे (हेलिकॉप्टर आधारित भूजल सर्वे) कराया गया था। अत्याधुनिक तकनीक से किए गए इस सर्वे की रिपोर्ट करीब 10 दिन पहले जारी की गई है। सर्वे रिपोर्ट को जिला कलेक्टर प्रताप सिंह को सौंपा गया, जिसमें पोकरण क्षेत्र में कुल 64 स्थानों पर जमीन के भीतर पानी मिलने की पुष्टि की गई है। इनमें से 55 गांव और ढाणी ऐसे बताए गए हैं, जहां पहली बार भूजल की मौजूदगी सामने आई है।
वरिष्ठ भूजल वैज्ञानिक डॉ. नारायण दास ईणखिया ने इस सर्वे को रेगिस्तानी इलाकों के लिए मील का पत्थर बताया है। उनके अनुसार पोकरण और भनियाणा क्षेत्र को अब तक भूजल की दृष्टि से अत्यंत कम जल स्तर वाला इलाका माना जाता था। यहां के कई गांवों में पीने के पानी तक की भारी समस्या रहती थी और लोगों को दूर-दराज से पानी लाना पड़ता था। ऐसे क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर पानी के स्रोत मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।
विशेषज्ञों के मुताबिक इस पूरे सर्वे की सबसे बड़ी सफलता फलसूंड क्षेत्र में पानी की उपलब्धता का पता चलना है। फलसूंड को अब तक बेहद शुष्क और लगभग जलविहीन क्षेत्र माना जाता रहा है। यहां पानी मिलने से न केवल पेयजल संकट दूर होने की उम्मीद जगी है, बल्कि भविष्य में कृषि और पशुपालन को भी नई दिशा मिल सकती है।
हेलिबॉर्न सर्वे की खास बात यह रही कि इसमें सिर्फ पानी की मौजूदगी ही नहीं, बल्कि पानी की मात्रा, गुणवत्ता और जमीन के नीचे मौजूद मिट्टी और चट्टानों की परतों का भी सटीक डेटा जुटाया गया है। इस तकनीक से यह स्पष्ट हो सका है कि किन स्थानों पर कितनी गहराई पर पानी है और वह उपयोग के लिए कितना उपयुक्त है। इससे भविष्य में बोरवेल और जल आपूर्ति योजनाओं को अधिक वैज्ञानिक तरीके से लागू किया जा सकेगा।
प्रशासन का कहना है कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर अब आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। जिन गांवों और ढाणियों में पानी मिलने की पुष्टि हुई है, वहां चरणबद्ध तरीके से जल स्रोत विकसित किए जाएंगे। इससे हजारों लोगों को राहत मिलने की संभावना है।
रेगिस्तान के सूखे इलाकों में पानी की यह खोज न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से अहम है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह सर्वे आने वाले समय में थार के मरुस्थलीय क्षेत्रों की तस्वीर बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

