जैसलमेर के पोकरण में भारतीय वायुसेना का युद्धाभ्यास 'वायु शक्ति 2026', वीडियो में जाने सुखोई और मिग-29 ने दिखाए जोरदार प्रदर्शन
राजस्थान में पाकिस्तान बॉर्डर के पास पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय वायुसेना के युद्धाभ्यास ‘वायु शक्ति 2026’ की फुल ड्रेस रिहर्सल जोर-शोर से चल रही है। इस अभ्यास का उद्देश्य भारतीय वायुसेना की तैयारी, हवाई ताकत और युद्धक रणनीति का प्रदर्शन करना है।
रिहर्सल की शुरुआत सुखोई MKI-30 से हुई, जिसने दुश्मन के रनवे और ठिकानों को टारगेट किया। सुखोई ने 44 बम बरसाकर ठिकानों को तबाह किया। बम गिरते ही धूल का गुबार उठ गया और वॉर जोन का माहौल तैयार हो गया। इसके बाद मिग-29 फाइटर जेट ने टैंकों के काफिले को ध्वस्त किया, जिससे युद्धक्षेत्र में वास्तविकता का एहसास हुआ।
रिहर्सल में आकाश मिसाइल ने भी शानदार प्रदर्शन किया और हवा में ही दुश्मन के टारगेट को तबाह किया। इसके साथ ही वॉर जोन में प्रचंड हेलिकॉप्टर ने एंट्री ली। हेलिकॉप्टर की गड़गड़ाहट और युद्धस्थल में उसकी उपस्थिति ने वास्तविक युद्ध की झलक पेश की।
आसमान में दो जगुआर विमान ने सुदर्शन फॉर्मेशन बनाकर टारगेट एरिया को अप्रोच किया। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के युद्धाभ्यास से न केवल एयरफोर्स की तैयारी परखने में मदद मिलती है, बल्कि सामरिक रणनीति और हवाई हमले की दक्षता भी बढ़ती है।
इस अभ्यास में शामिल सभी एयरक्राफ्ट और हथियारों का समन्वय बेहद सटीक दिखा। अधिकारियों ने बताया कि रिहर्सल का उद्देश्य संभावित वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करना है। अभ्यास में एंटी-एयरक्राफ्ट और जमीन पर स्थित टारगेट पर सटीक निशाना साधने की तकनीक का भी परीक्षण किया गया।
वायुसेना अधिकारी ने कहा, “वायु शक्ति 2026 हमारे पायलटों और तकनीकी कर्मचारियों की तैयारी का प्रमाण है। यह अभ्यास हमारी सामरिक ताकत, नवीनतम हथियार प्रणालियों और युद्धक क्षमता को प्रदर्शित करता है।”
स्थानीय लोगों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने भी युद्धाभ्यास के प्रभावशाली प्रदर्शन की सराहना की। उनका कहना है कि इस तरह के अभ्यास न केवल सुरक्षा में विश्वास बढ़ाते हैं, बल्कि देश के हवाई क्षेत्र की ताकत और तत्परता का संदेश भी देते हैं।
कुल मिलाकर, पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में चल रहे इस युद्धाभ्यास ने भारतीय वायुसेना की ताकत, सामरिक कौशल और आधुनिक हथियारों के प्रभावी उपयोग को दिखाया। यह रिहर्सल भविष्य में किसी भी चुनौती का सामना करने में वायुसेना की तैयारी को सुनिश्चित करती है।

