वायुशक्ति‑2026 के पूर्वाभ्यास में भारतीय वायुसेना ने पोखरण में आकाश प्रभुत्व का शानदार प्रदर्शन किया
आगामी वायुशक्ति‑2026 मेगा ड्रिल से पहले भारतीय वायुसेना (IAF) ने पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में अपने सामरिक कौशल और आकाश प्रभुत्व का प्रभावशाली पूर्वाभ्यास किया है। रेगिस्तानी आसमान में गर्जना करते हुए IAF के राफेल, सुखोई, मिराज, जगुआर जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों ने विभिन्न स्थितियों में मारक क्षमता और युद्ध कौशल का जो प्रदर्शन किया, उसने देश और सुरक्षा विशेषज्ञों को भी प्रभावित किया है।
पूर्वाभ्यास पर 120 से अधिक एयर प्लेटफॉर्म ने दमदार प्रदर्शन किया, जिनमें 77 लड़ाकू विमान, 43 हेलीकॉप्टर और 8 परिवहन विमान शामिल थे। राफेल और सुखोई विमानों ने लंबी दूरी पर सटीक प्रहार क्षमता, जबकि मिराज‑2000 और जगुआर विमानों ने नकली दुश्मन ठिकानों पर ग्राउंड अटैक दिखाया। वहीं, प्रचंड और चिनूक हेलीकॉप्टरों ने सामरिक गतिशीलता और शक्ति का परिचय दिया।
पूर्वाभ्यास में लोइटरिंग म्यूनिशन, काउंटर ड्रोन टेक्नोलॉजी और मानव रहित प्रणालियों जैसे आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल भी शामिल रहा, जिससे भविष्य के युद्ध के परिदृश्यों का अभ्यास किया गया। इसके अलावा, सर्च और रेस्क्यू तथा कठिन भूभाग में त्वरित एयरलिफ्ट संचालन जैसी क्षमताओं का भी सफल प्रदर्शन हुआ।
पूर्वाभ्यास का आयोजन मुख्य कार्यक्रम से तीन दिन पहले हुआ, ताकि वायुसेना की तत्परता और सामरिक कार्यक्षमता को अंतिम रूप दिया जा सके। यह अभ्यास 27 फरवरी को होने वाले मेगा “वायुशक्ति‑2026” का पूर्वाभ्यास है, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी और मुख्य ड्रिल को देखगी।
वायुशक्ति‑2026 अभ्यास अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा माहौल और मजबूती का संदेश देने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका आयोजन भारत‑पाकिस्तान सीमा से करीब थार मरुस्थल तक के क्षेत्र में किया जा रहा है, जिससे सीमा सुरक्षा और सामरिक तैयारी के संदर्भ में यह अहम माना जा रहा है।
पूर्वाभ्यास में हुई गतिविधियों से यह स्पष्ट हुआ है कि भारतीय वायुसेना दिन‑दुःस्वा‑रात्रि सभी परिस्थितियों में संचालन करने में सक्षम है और एयर डोमिनेंस बनाए रखने में पूरी तरह तैयार है। अभ्यास के समन्वयन, तकनीकी दक्षता और नेतृत्व कौशल ने यह संदेश दिया है कि देश की वायु शक्ति आज विश्व भर में अपनी प्रतिष्ठा और मजबूती का परिचय देती है।
वायुशक्ति‑2026 राष्ट्रीय सुरक्षा की दृढ़ता का परिचायक होगा और भारतीय वायुसेना की प्रभावी तैयारियों को स्पष्ट कर देगा। इसके जरिए दुश्मन को यह संदेश भी जाता है कि भारत हवा में अपनी प्रभुता बनाए रखने में सक्षम है और किसी भी प्रकार की चुनौती का सामना करने के लिए सतर्क है

