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डॉ. मोहन भागवत ने जैसलमेर में सोनार दुर्ग और चादर महोत्सव का किया दौरा, वीडियो में देंखे एकता और सद्भाव का संदेश दिया

डॉ. मोहन भागवत ने जैसलमेर में सोनार दुर्ग और चादर महोत्सव का किया दौरा, वीडियो में देंखे एकता और सद्भाव का संदेश दिया

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत शुक्रवार को जैसलमेर पहुंचे और यहां उन्होंने ऐतिहासिक स्थलों और कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। वे पहले ई-रिक्शा में बैठकर सोनार दुर्ग पहुँचे, जहां उन्होंने जैन धर्म के पवित्र स्थल पार्श्वनाथ जैन मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने जिनभद्र सूरी ज्ञान भंडार और दादा गुरुदेव की पावन चादर के दर्शन किए।

इसके बाद डॉ. भागवत देदांसर मेला ग्राउंड पहुंचे, जहां तीन दिवसीय चादर महोत्सव का मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस दौरान उन्होंने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए सद्भावना और एकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सभी को कुटुम्ब मित्र बनाने का प्रयास करना चाहिए और इसकी शुरुआत आज से करनी होगी। उनका कहना था कि समय बड़ा कठिन है और समाज में चल रहे आक्रामण का कारण हमारी नींद और अनदेखी है।

डॉ. भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि “हम सभी भेदभाव और स्वार्थ को तिलांजली दें और देश के लिए जीने और मरने की भावना अपनाएं। यदि हम ऐसा करेंगे तो हमारा समाज बेहतर बनेगा, कलह और भेद मिटेंगे, और भारत विश्वगुरु बनकर एक सुखी और सुंदर दुनिया को जन्म देगा।”

इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे अपनी जीवनशैली में सहिष्णुता, एकता और मानवता को अपनाएं। उनका कहना था कि सिर्फ धार्मिक या सामाजिक मतभेदों को छोड़कर, समाज को जोड़ने की दिशा में कदम उठाने होंगे।

कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों के अलावा संघ के पदाधिकारी और स्वयंसेवक भी उपस्थित थे। सभी ने डॉ. भागवत के विचारों से प्रेरणा लेते हुए एकजुटता और सहयोग का संकल्प लिया। आयोजन में सुरक्षा और व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि डॉ. भागवत का यह दौरा न केवल जैसलमेर के सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों के महत्व को दर्शाता है, बल्कि सामाजिक एकता और समरसता को बढ़ावा देने का भी प्रयास है। उनका यह संदेश वर्तमान समय में समाज में बढ़ते मतभेद और तनाव को कम करने में मददगार साबित हो सकता है।

जैसलमेर के नागरिकों ने डॉ. भागवत के आगमन को ऐतिहासिक बताया और कहा कि उनके संदेश से स्थानीय युवा और समाज के सभी वर्गों में सकारात्मक ऊर्जा और राष्ट्रभक्ति की भावना जागृत होगी।

इस तीन दिवसीय चादर महोत्सव का उद्देश्य न केवल धार्मिक आस्था का प्रदर्शन करना है, बल्कि सामाजिक समरसता और सद्भावना का संदेश फैलाना भी है। डॉ. भागवत के आगमन और उनके विचारों ने इस आयोजन की गरिमा और भी बढ़ा दी।

जैसलमेर में इस अवसर पर हुए कार्यक्रम और उनके संदेश ने सभी उपस्थित लोगों को प्रेरित किया कि वे भेदभाव, स्वार्थ और कलह को छोड़कर समाज की भलाई के लिए काम करें, जिससे भारत एक सशक्त, एकजुट और विश्वगुरु राष्ट्र बन सके।

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