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राजस्थान सीमा पर सुरक्षा का नया चक्रव्यूह, वीडियो में देंखे ‘भैरव बटालियन’ और ड्रोन प्लाटून की तैनाती से हाई-टेक निगरानी मजबूत

राजस्थान सीमा पर सुरक्षा का नया चक्रव्यूह, वीडियो में देंखे ‘भैरव बटालियन’ और ड्रोन प्लाटून की तैनाती से हाई-टेक निगरानी मजबूत

राजस्थान से सटी लगभग 1,070 किलोमीटर लंबी भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए बड़ा बदलाव किया गया है। सीमावर्ती इलाकों में अब पारंपरिक निगरानी व्यवस्था के साथ अत्याधुनिक तकनीक को जोड़ते हुए नई रणनीति लागू की जा रही है, जिससे सीमा पर चौकसी और तेज़ तथा अधिक प्रभावी बनाई जा सके।सूत्रों के अनुसार, सीमा सुरक्षा ढांचे में अब ‘भैरव बटालियन’ के साथ एक विशेष ‘अशनी ड्रोन प्लाटून’ को भी तैनात किया गया है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य न केवल सीमावर्ती गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाना है, बल्कि किसी भी संदिग्ध हलचल या घुसपैठ की स्थिति में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करना भी है।

बताया जा रहा है कि ये वेपन-सक्षम ड्रोन दिन-रात सीमा क्षेत्र की निगरानी करेंगे और वास्तविक समय (रियल टाइम) में जानकारी कंट्रोल रूम तक पहुंचाएंगे। इससे सुरक्षा बलों को तेज निर्णय लेने में मदद मिलेगी और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया संभव हो सकेगी।रक्षा सूत्रों के मुताबिक, यह ड्रोन यूनिट केवल निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि विशेष परिस्थितियों में ऑपरेशनल सपोर्ट भी प्रदान कर सकती है। यानी आवश्यकता पड़ने पर यह तकनीक जमीनी बलों के साथ मिलकर संयुक्त ऑपरेशन में भी भूमिका निभा सकती है।

नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ड्रोन यूनिट को सीधे भैरव बटालियन के साथ समन्वय में रखा गया है। इसका मतलब है कि हवाई निगरानी और जमीनी कार्रवाई के बीच एक मजबूत तालमेल स्थापित किया गया है, जिससे किसी भी खतरे का तुरंत जवाब दिया जा सके।सेना के अधिकारियों के अनुसार, आने वाले वर्षों में भारतीय सेना का लक्ष्य है कि देश की 350 से अधिक इन्फैंट्री बटालियनों को धीरे-धीरे “ड्रोन-सक्षम यूनिट” में बदला जाए। इस योजना के तहत सैनिकों को आधुनिक तकनीक, ड्रोन संचालन और डिजिटल युद्ध प्रणाली का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के युद्ध अब केवल जमीनी या पारंपरिक नहीं रहेंगे, बल्कि तकनीक आधारित होंगे। ऐसे में ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों का उपयोग रक्षा प्रणाली को और मजबूत करेगा।सीमा क्षेत्रों में लंबे समय से निगरानी और घुसपैठ रोकने को लेकर चुनौती बनी रहती है। ऐसे में इस नई व्यवस्था को सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ड्रोन तकनीक के आने से अब बड़े क्षेत्रों की निगरानी कम समय में और अधिक सटीक तरीके से संभव हो सकेगी।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि नई तकनीक के साथ-साथ मानवीय निगरानी और रणनीतिक योजना की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण रहेगी। केवल तकनीक पर निर्भरता किसी भी सुरक्षा व्यवस्था के लिए पर्याप्त नहीं होती। फिलहाल, सीमा पर तैनात यह नई जुगलबंदी आने वाले समय में भारत की सुरक्षा रणनीति में एक बड़ा बदलाव मानी जा रही है। इससे न केवल निगरानी क्षमता बढ़ेगी, बल्कि त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली भी पहले से अधिक मजबूत होगी।

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