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जैसलमेर में AI तकनीक से पैदा हुए गोडावण, ब्रीडिंग सेंटर्स में कुनबा हुआ 86, वीडियो में जानें जंगल में छोड़ने से पहले खास टनल में होगी ट्रेनिंग

जैसलमेर में AI तकनीक से पैदा हुए गोडावण, ब्रीडिंग सेंटर्स में कुनबा हुआ 86, वीडियो में जानें जंगल में छोड़ने से पहले खास टनल में होगी ट्रेनिंग

राजस्थान के रेगिस्तान में राज्य पक्षी गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) के संरक्षण अभियान को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली है। रामदेवरा और सम स्थित ब्रीडिंग सेंटर में हाल ही में दो नए चूजों के जन्म के साथ इन केंद्रों में गोडावणों की कुल संख्या बढ़कर 86 हो गई है।

यह सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि इन चूजों का जन्म आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक आर्टिफिशियल इंसेमिनेशन (AI) के माध्यम से संभव हुआ है। संरक्षण वैज्ञानिकों के अनुसार अब तक इस तकनीक की मदद से कुल 26 गोडावण चूजों का सफलतापूर्वक जन्म कराया जा चुका है।

आधुनिक तकनीक से संरक्षण में नई उम्मीद

गोडावण जैसी विलुप्तप्राय प्रजाति के संरक्षण में आर्टिफिशियल इंसेमिनेशन तकनीक एक बड़ा बदलाव लेकर आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक ने प्रजनन दर बढ़ाने और प्रजाति को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रामदेवरा ब्रीडिंग सेंटर में 10 मई और सम सेंटर में 11 मई को दो नए चूजों ने जन्म लिया, जो पूरी तरह से AI तकनीक से विकसित हुए हैं।

जंगल में छोड़ने से पहले विशेष ट्रेनिंग

वन विभाग के अनुसार, गोडावणों को सीधे जंगल में नहीं छोड़ा जाएगा। इसके लिए एक विशेष तैयारी की जा रही है। रामदेवरा सेंटर में एक “सॉफ्ट रिलीज टनल” बनाई जा रही है, जहां छोटे गोडावणों को प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पक्षी जंगल में खुद को आसानी से ढाल सकें और जीवित रहने की क्षमता विकसित कर सकें।

संरक्षण अभियान को मिल रही गति

राजस्थान सरकार और वन विभाग द्वारा चलाए जा रहे गोडावण संरक्षण अभियान को इन सफलताओं से नई ऊर्जा मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही प्रयास जारी रहे तो आने वाले वर्षों में गोडावणों की संख्या में और बढ़ोतरी संभव है।

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