विश्व थैलेसीमिया दिवस, वीडियो में देंखे समय पर जांच और जागरूकता से बचाई जा सकती है बच्चों की जिंदगी
आज पूरी दुनिया में विश्व थैलेसीमिया दिवस मनाया जा रहा है। यह दिन एक गंभीर अनुवांशिक (जेनेटिक) बीमारी थैलेसीमिया के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से मनाया जाता है, जो मुख्य रूप से छोटे बच्चों को प्रभावित करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर जांच और सही जानकारी के जरिए इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है।थैलेसीमिया एक ऐसी रक्त संबंधी बीमारी है, जिसमें शरीर में हीमोग्लोबिन बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है। इसके कारण मरीज को बार-बार खून चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है। यह बीमारी जन्म से ही मौजूद होती है और माता-पिता से बच्चों में अनुवांशिक रूप से पहुंचती है।
चिकित्सकों के अनुसार, थैलेसीमिया का इलाज संभव है, लेकिन यह पूरी तरह मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है। इसका सबसे प्रभावी उपचार बोन मैरो ट्रांसप्लांट माना जाता है, जिसमें स्वस्थ बोन मैरो के जरिए रोगी के शरीर में सामान्य रक्त निर्माण प्रक्रिया को बहाल किया जाता है। हालांकि यह प्रक्रिया जटिल और महंगी होती है।स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि थैलेसीमिया को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका जागरूकता और समय पर स्क्रीनिंग है। शादी से पहले और गर्भावस्था के दौरान थैलेसीमिया की जांच कराना बेहद जरूरी माना जाता है, ताकि जोखिम का पहले ही पता लगाया जा सके।
डॉक्टरों के अनुसार, यदि माता-पिता दोनों थैलेसीमिया माइनर हों, तो उनके बच्चे में थैलेसीमिया मेजर होने की संभावना लगभग 25 प्रतिशत तक हो सकती है। थैलेसीमिया मेजर एक गंभीर स्थिति होती है, जिसमें बच्चे को जीवनभर नियमित रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है।विशेषज्ञों का कहना है कि जेनेटिक काउंसलिंग के माध्यम से ऐसे दंपतियों को सही मार्गदर्शन दिया जा सकता है, जिससे वे भविष्य में होने वाले जोखिमों को समझ सकें और सही निर्णय ले सकें। इससे न केवल बीमारी को रोका जा सकता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी सुरक्षित रखा जा सकता है।
स्वास्थ्य संगठनों ने इस अवसर पर लोगों से अपील की है कि वे थैलेसीमिया को लेकर जागरूक बनें और नियमित स्वास्थ्य जांच को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं। साथ ही समाज में इस बीमारी के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर करने की भी जरूरत पर जोर दिया गया है। फिलहाल, थैलेसीमिया दिवस का मुख्य संदेश यही है कि सही जानकारी, समय पर जांच और जिम्मेदार निर्णयों के जरिए इस गंभीर बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और कई मासूम बच्चों का जीवन बचाया जा सकता है।

