जयपुर मेयर की कुर्सी पर किसका नाम तय होगा? BJP में लॉबिंग तेज, वीडियो में जाने वैश्य- ब्राह्मण-राजपूत समीकरण पर मंथन
जयपुर नगर निगम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 150 में से 78 सीटें जीतकर बहुमत हासिल कर लिया है। बहुमत मिलने के बाद अब पार्टी के भीतर मेयर और डिप्टी मेयर पद को लेकर मंथन और लॉबिंग तेज हो गई है। भाजपा के सामने अब सबसे बड़ा सवाल मेयर और डिप्टी मेयर के लिए नाम तय करने का है। पार्टी स्तर पर पार्षदों से रायशुमारी किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। जयपुर नगर निगम में बहुमत का आंकड़ा 76 है। भाजपा को 78 सीटें मिली हैं, जबकि कांग्रेस ने 53 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 15 सीटों पर जीत दर्ज की है। हालांकि चार वार्डों में री-पोलिंग से जुड़ी प्रक्रिया भी हुई है, लेकिन उपलब्ध नतीजों में भाजपा बहुमत के आंकड़े से ऊपर है।
मेयर पद के लिए वैश्य समाज की चर्चा
मेयर पद को लेकर भाजपा के भीतर सामाजिक समीकरणों पर भी चर्चा चल रही है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वैश्य समाज से मेयर बनाने की संभावना को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है। इसी क्रम में पार्टी के भीतर कई नामों पर विचार होने की खबरें हैं।सुनील कोठारी और पुनीत कर्नावट के नाम प्रमुखता से चर्चा में बताए जा रहे हैं। कर्नावट जयपुर नगर निगम के पूर्व डिप्टी मेयर रह चुके हैं। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी मेयर पद के लिए किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
डिप्टी मेयर पद पर कई सामाजिक समीकरण
मेयर पद के लिए यदि वैश्य समाज से चेहरा चुना जाता है तो डिप्टी मेयर पद को लेकर दूसरे सामाजिक समीकरणों पर विचार किए जाने की चर्चा है। रिपोर्टों के अनुसार, ब्राह्मण और राजपूत नेताओं की ओर से भी दावेदारी और लॉबिंग चल रही है।इसके अलावा मूल ओबीसी वर्ग से किसी पार्षद को डिप्टी मेयर बनाने का विकल्प भी पार्टी के सामने बताया जा रहा है। इस तरह भाजपा नेतृत्व के सामने दोनों पदों के लिए सामाजिक प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक समीकरणों को संतुलित करने की चुनौती है।
पार्षदों से भी ली गई राय
मेयर और डिप्टी मेयर के नाम तय करने से पहले भाजपा अपने पार्षदों की राय जानने की प्रक्रिया में भी जुटी है। रिपोर्टों के अनुसार, बाड़ेबंदी में रखे गए भाजपा पार्षदों से पदों को लेकर रायशुमारी की गई है।पार्टी नेतृत्व के लिए यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव पार्षदों के बीच होने वाला है। ऐसे में पार्टी संगठन की पसंद के साथ पार्षदों के बीच समर्थन को भी ध्यान में रखा जा सकता है।
विधायकों की अलग राय
जयपुर शहर के भाजपा विधायकों की ओर से प्रदेश नेतृत्व के सामने एक अलग सुझाव रखे जाने की भी चर्चा है। बताया जा रहा है कि कुछ विधायक चाहते हैं कि मेयर उनके विधानसभा क्षेत्र से नहीं बनाया जाए। इसके बजाय उन विधानसभा क्षेत्रों से दावेदारों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है, जहां वर्तमान में भाजपा का विधायक नहीं है।इस राय के पीछे राजनीतिक कारणों को लेकर अलग-अलग चर्चाएं हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र में किसी दूसरे मजबूत राजनीतिक चेहरे के उभरने को लेकर सतर्क हो सकते हैं। हालांकि, यह विश्लेषण है और संबंधित विधायकों की ओर से इस मंशा की पुष्टि नहीं की गई है।फिलहाल भाजपा में मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए नामों पर मंथन जारी है। अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा। जयपुर के मेयर का चुनाव 21 सितंबर और डिप्टी मेयर का चुनाव 22 सितंबर को प्रस्तावित है।

