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वीडियो में देंखे जयपुर के श्री गोविंददेवजी मंदिर में रंगों और भक्ति के साथ होली उत्सव

वीडियो में देंखे जयपुर के श्री गोविंददेवजी मंदिर में रंगों और भक्ति के साथ होली उत्सव

जयपुर के प्रसिद्ध श्री गोविंददेवजी मंदिर में आज पूरे उत्साह और भक्ति के साथ होली उत्सव मनाया जा रहा है। सुबह से ही मंदिर परिसर को विशेष झांकियों और फूलों से सजाया गया है, जिससे वातावरण भक्तिमय और रंगीन दिखाई दे रहा है।

सुबह 10:30 बजे सबसे पहले ठाकुर जी को फूलों की होली अर्पित की गई। इसके बाद भक्तों ने गुलाल चढ़ाकर आरती की। मंदिर की राजभोग झांकी में भी ठाकुर श्रीजी को गुलाल अर्पित किया गया और विशेष आरती का आयोजन किया गया।

भक्तों ने चंग की थाप और पारंपरिक होली गीतों के साथ रंगों की होली का आनंद लिया। मंदिर प्रशासन ने भी इस अवसर को देखते हुए दर्शन व्यवस्था को विशेष रूप से लागू किया है, ताकि भक्त सुरक्षित और सुव्यवस्थित तरीके से उत्सव में भाग ले सकें।

आज मंदिर में दर्शन का पूरा कार्यक्रम इस प्रकार है:

  • मंगला झांकी: सुबह 4:00 से 6:30 बजे तक

  • धूप दर्शन: सुबह 7:00 से 8:45 बजे तक

  • श्रृंगार दर्शन: सुबह 9:30 से 10:15 बजे तक

  • राजभोग दर्शन: सुबह 10:45 से 11:30 बजे तक

  • ग्वाल दर्शन: शाम 4:45 से 5:15 बजे तक

  • अभिषेक दर्शन: शाम 5:45 से 7:15 बजे तक, इसके बाद संध्या आरती

  • शयन झांकी: रात 7:45 से 8:30 बजे तक

विशेषज्ञों और मंदिर प्रशासन ने भक्तों से अपील की है कि वे दर्शन और होली उत्सव में सुरक्षित और अनुशासित तरीके से भाग लें। मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त स्टाफ तैनात किया गया है।

भक्तों का कहना है कि श्री गोविंददेवजी मंदिर में होली खेलना एक आध्यात्मिक अनुभव है। फूलों और रंगों के माध्यम से भक्ति का आनंद लेने के साथ ही यह त्योहार सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है।

मंदिर प्रशासन ने इस वर्ष सुरक्षा और व्यवस्था को और सुदृढ़ किया है। विशेष झांकियों, फूलों, गुलाल और पारंपरिक होली गीतों के साथ इस उत्सव को भव्य बनाने का प्रयास किया गया है।

जयपुर के लोग और देश-विदेश के भक्त आज मंदिर में आकर इस धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव का आनंद ले रहे हैं। यह अवसर केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि भक्ति और श्रद्धा का पर्व भी है।

इस प्रकार, श्री गोविंददेवजी मंदिर में होली का उत्सव आज भक्तिमय और रंगीन वातावरण के साथ मनाया जा रहा है। मंदिर प्रशासन और भक्तों की सावधानी, उत्साह और भक्ति ने इस दिन को और यादगार बना दिया है।

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