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 श्री गोविंददेवजी मंदिर में जया किशोरी की तीन दिवसीय वीडियो में देंखे “नानी बाई रो मायरा” कथा की शुरुआत

 श्री गोविंददेवजी मंदिर में जया किशोरी की तीन दिवसीय वीडियो में देंखे “नानी बाई रो मायरा” कथा की शुरुआत

श्री गोविंददेवजी मंदिर परिसर में बुधवार से प्रसिद्ध कथावाचक जया किशोरी की तीन दिवसीय “नानी बाई रो मायरा” कथा का आयोजन शुरू हुआ। पहले दिन कथा के दौरान जया किशोरी ने बेटियों और उनके अधिकारों के विषय में महत्वपूर्ण संदेश दिए।

बेटियों की इच्छाओं का सम्मान करने पर जोर

कथा में जया किशोरी ने माता-पिता से सीधे संवाद करते हुए कहा कि अक्सर हम अपनी बेटियों को कहते हैं कि “यह काम शादी के बाद करना” या “कहीं घूमना है तो शादी के बाद जाना।” उन्होंने इस प्रवृत्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि आजकल के समय में यह कहना उचित नहीं है।

जया किशोरी ने बताया, "किसको क्या पता कि शादी के बाद बेटी को कैसा घर और परिवार मिलेगा। इसलिए जब तक बेटी आपके साथ है, उसे जीवन जीने दो। उसकी इच्छाओं और खुशियों का सम्मान कीजिए।"

शिक्षा और जीवन में बेटियों को बांधने की गलती न करें

कथावाचक ने आगे कहा कि माता-पिता यह सोचते हैं कि वे अपनी बेटियों के लिए अच्छा जीवन और सही घर ढूंढेंगे, लेकिन आज के दौर में पढ़ा-लिखा और संस्कारी व्यक्ति भी अपेक्षाओं के अनुसार व्यवहार न कर पाए। ऐसे में बेटी की खुशियों को “शादी के बाद” की शर्तों में बांधना अनुचित है।

जया किशोरी ने जोर देकर कहा कि माता-पिता को अपनी बेटियों की इच्छाओं और निर्णयों का सम्मान करना चाहिए और उन्हें अपने जीवन को स्वतंत्र रूप से जीने का अवसर देना चाहिए।

कथा में बच्चों और माता-पिता की भागीदारी

कथा कार्यक्रम में बच्चों और माता-पिता की अच्छी खासी उपस्थिति रही। पहले दिन की कथा में भक्तों ने जया किशोरी के संदेशों को ध्यानपूर्वक सुना और उनके व्याख्यान से प्रेरणा ली। तीन दिवसीय कथा का उद्देश्य न केवल धार्मिक कथाओं के माध्यम से नैतिक शिक्षा देना है, बल्कि जीवन के महत्वपूर्ण मुद्दों पर जागरूकता फैलाना भी है।

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