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वीडियो में देखें! आचार्य महाश्रमण मर्यादा महोत्सव में वसुंधरा राजे का संदेश—दिल दुखाना भी हिंसा, अहिंसा का मार्ग ही जीवन का आधार

वीडियो में देखें! आचार्य महाश्रमण मर्यादा महोत्सव में वसुंधरा राजे का संदेश—दिल दुखाना भी हिंसा, अहिंसा का मार्ग ही जीवन का आधार

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने जैन धर्म के मूल सिद्धांतों और अहिंसा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि जैन धर्म पूरी तरह अहिंसा पर आधारित है। उन्होंने कहा कि किसी भी जीव या प्राणी के जीवन को नुकसान पहुंचाना हिंसा माना गया है। हिंसा केवल हथियार उठाने या किसी को मारने-पीटने तक सीमित नहीं होती, बल्कि किसी का दिल दुखाना और किसी का दिल तोड़ना भी हिंसा का ही रूप है।

वसुंधरा राजे यह बात सोमवार को डीडवाना-कुचामन जिले के छोटी खाटू कस्बे में आयोजित आचार्य महाश्रमण मर्यादा महोत्सव के दौरान कही। उन्होंने अपने संबोधन में आध्यात्मिक मूल्यों को राजनीति और सामाजिक जीवन से जोड़ते हुए कहा कि राजनीति में अक्सर ऐसे हालात बन जाते हैं, जहां लोगों के दिल दुखाए जाते हैं और रिश्ते टूटते हैं। लेकिन अहिंसा का वास्तविक पालन तभी संभव है, जब शब्दों और व्यवहार में भी संयम रखा जाए।

उन्होंने कहा, “राजनीति में दिल तोड़े भी जाते हैं और दिल दुखाए भी जाते हैं, लेकिन हमें यह समझना होगा कि अहिंसा सिर्फ शारीरिक हिंसा से बचने का नाम नहीं है। भावनात्मक हिंसा भी उतनी ही पीड़ादायक होती है।” वसुंधरा राजे ने कहा कि समाज और राजनीति दोनों में शांति और संतुलन बनाए रखने के लिए अहिंसा के सिद्धांतों को व्यवहार में उतारना जरूरी है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने जीवन मूल्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें यह संस्कार राजमाता विजया राजे सिंधिया से मिले हैं। उन्होंने कहा, “राजमाता ने मुझे सिखाया है कि जीवन में कभी किसी का मन आहत मत करो। मैं उन्हीं की राह पर चलने का प्रयास कर रही हूं।” उन्होंने कहा कि यह शिक्षा न केवल व्यक्तिगत जीवन में, बल्कि सार्वजनिक जीवन और राजनीति में भी मार्गदर्शक की भूमिका निभाती है।

कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालुओं और संत समाज को संबोधित करते हुए वसुंधरा राजे ने कहा कि आचार्य महाश्रमण जैसे महान संतों के विचार समाज को सही दिशा दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि मर्यादा, संयम और करुणा के बिना किसी भी समाज की कल्पना नहीं की जा सकती।

मर्यादा महोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में जैन समाज के अनुयायी, संत-महात्मा और स्थानीय लोग मौजूद रहे। आयोजन स्थल पर आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला, जहां अनुशासन, शांति और भक्ति का भाव स्पष्ट नजर आया।

कुल मिलाकर, वसुंधरा राजे का यह संबोधन राजनीति से ऊपर उठकर मानवीय संवेदनाओं और अहिंसा के मूल्यों को केंद्र में रखने वाला रहा, जिसने उपस्थित जनसमूह को गहरी सोच और आत्ममंथन का संदेश दिया।

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