इंडिया–पाकिस्तान मैचों पर वीरेंद्र सहवाग ने सुनाए मजेदार किस्से, वीडियो में देखें बोले– शोएब अख्तर को बल्ले से दिया जवाब
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व विस्फोटक ओपनर वीरेंद्र सहवाग ने इंडिया–पाकिस्तान मुकाबलों से जुड़े अपने यादगार अनुभवों को एक बार फिर साझा किया है। सहवाग ने बताया कि उनका अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर की शुरुआत ही पाकिस्तान के खिलाफ हुई थी और वह अनुभव उनके लिए आसान नहीं रहा। उन्होंने कहा कि पहले ही मैच में उन्हें काफी कुछ सुनने को मिला, लेकिन उसी वक्त उन्होंने मन में ठान लिया था कि अगर दोबारा पाकिस्तान के खिलाफ खेलने का मौका मिला, तो वह मैदान पर ही अपने खेल से जवाब देंगे।
वीरेंद्र सहवाग ने बताया कि उनका यह संकल्प साल 2004 में पूरा हुआ, जब भारत के पाकिस्तान दौरे के दौरान उन्हें मुल्तान टेस्ट खेलने का मौका मिला। इस ऐतिहासिक टेस्ट मैच में सहवाग ने 309 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली और ट्रिपल सेंचुरी लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बने। उन्होंने कहा कि उस पारी के जरिए उन्होंने उन तमाम बातों का जवाब दिया, जो उन्होंने अपने करियर की शुरुआत में सुनी थीं। सहवाग के अनुसार, यह पारी सिर्फ एक बड़ी पारी नहीं थी, बल्कि उनके लिए आत्मसम्मान और जवाब देने का सबसे बेहतरीन तरीका थी।
सहवाग ने मुल्तान टेस्ट से जुड़ा एक और दिलचस्प किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वह 228 रन बनाकर नॉटआउट थे, तब पाकिस्तान के तेज गेंदबाज शोएब अख्तर के साथ उनकी मैदान पर बहस हो गई थी। उस दौरान माहौल काफी गर्म हो गया था और उसी बहस के बीच सहवाग के मुंह से एक डायलॉग निकल गया, जो बाद में क्रिकेट इतिहास का मशहूर किस्सा बन गया। सहवाग ने मैदान पर कहा था, “बाप बाप होता है, बेटा बेटा होता है।”
सहवाग ने हंसते हुए बताया कि उन्हें उस वक्त अंदाजा भी नहीं था कि यह एक लाइन इतनी ज्यादा फेमस हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके बाद यह डायलॉग इंडिया–पाकिस्तान क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता का हिस्सा बन गया। आज भी जब भी भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबला होता है, तो यह किस्सा पाकिस्तान के खिलाड़ियों और वहां के फैंस के बीच जरूर दोहराया जाता है।
पूर्व भारतीय ओपनर ने कहा कि इंडिया–पाकिस्तान मैच सिर्फ क्रिकेट नहीं होते, बल्कि उनमें भावनाएं, दबाव और जुनून सब कुछ शामिल होता है। ऐसे मुकाबलों में मानसिक मजबूती बेहद जरूरी होती है। सहवाग ने कहा कि उन्होंने हमेशा यही कोशिश की कि मैदान पर किसी भी तरह के दबाव को अपने खेल पर हावी न होने दें और जवाब सिर्फ बल्ले से दें।
सहवाग के इन बयानों ने एक बार फिर 2004 के ऐतिहासिक भारत–पाकिस्तान दौरे की यादें ताजा कर दी हैं। मुल्तान की वह पारी आज भी भारतीय क्रिकेट इतिहास की सबसे यादगार पारियों में गिनी जाती है और सहवाग का यह किस्सा इंडिया–पाकिस्तान क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता का एक अहम हिस्सा बना हुआ है।

