विधानसभा में राहुल गांधी पर टिप्पणी को लेकर हंगामा, वीडियो में देखें भाजपा विधायक के बयान पर कांग्रेस का विरोध
राज्य विधानसभा में गुरुवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस के दौरान सियासी माहौल उस समय गरमा गया, जब ब्यावर से भाजपा विधायक शंकर सिंह रावत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। शंकर सिंह रावत द्वारा “पप्पू” शब्द का इस्तेमाल किए जाने पर कांग्रेस विधायकों ने कड़ा विरोध जताया और सदन में नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कुछ समय के लिए सदन की कार्यवाही बाधित रही।
बहस के दौरान भाजपा विधायक शंकर सिंह रावत ने कहा कि राहुल गांधी विदेश जाकर देश की बुराई करते हैं। इसी क्रम में उन्होंने राहुल गांधी के लिए “पप्पू” शब्द का प्रयोग किया। इतना ही नहीं, उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, “कांग्रेस नेता ध्यान दें, वो अब पप्पू नहीं रहे। आपको उसकी सगाई करनी चाहिए, उसके हाथ पीले करने हैं। हमारा समय खराब नहीं करें।” इस बयान के बाद कांग्रेस विधायकों ने एकजुट होकर विरोध जताया और सदन में शोर-शराबा शुरू कर दिया।
कांग्रेस विधायकों का कहना था कि सदन जैसे गरिमामय मंच पर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल निंदनीय है और इससे संसदीय मर्यादाओं का उल्लंघन होता है। कांग्रेस सदस्यों ने शंकर सिंह रावत से माफी की मांग करते हुए नारेबाजी की, जिससे सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए ठप हो गई। विपक्ष का आरोप था कि भाजपा नेता जानबूझकर सदन का माहौल खराब कर रहे हैं।
हंगामे के बीच सभापति ने हस्तक्षेप करते हुए शंकर सिंह रावत को फटकार लगाई और उचित शब्दों के प्रयोग की सलाह दी। सभापति ने कहा कि सदन में सभी सदस्यों को मर्यादा और संयम का पालन करना चाहिए तथा व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचना चाहिए। इसके बावजूद कांग्रेस विधायकों का आक्रोश कुछ देर तक जारी रहा।
इस बीच मंत्री अविनाश गहलोत भी बहस में शामिल हुए और उन्होंने शंकर सिंह रावत के बयान का समर्थन करते हुए विवाद को और बढ़ा दिया। अविनाश गहलोत ने कहा, “हमारे शंकर सिंह गलत कहा बोल रहे हैं। आप गूगल सर्च करोगे तो वही बात आएगी, जो शंकर सिंह बता रहे हैं।” मंत्री के इस बयान के बाद कांग्रेस विधायकों का विरोध और तेज हो गया। कांग्रेस सदस्यों ने इसे सत्ता पक्ष की असंवेदनशीलता बताते हुए सदन में जोरदार नारेबाजी की।
लगातार हो रहे हंगामे और शोर-शराबे के चलते सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी। स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयासों के बावजूद जब माहौल शांत नहीं हुआ, तो सभापति ने विधानसभा की कार्यवाही को शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।
इस घटनाक्रम के बाद विधानसभा परिसर में भी राजनीतिक हलचल तेज रही। कांग्रेस नेताओं ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भाजपा नेताओं की भाषा लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और ऐसे बयान सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं। वहीं भाजपा नेताओं का कहना था कि विपक्ष बेवजह मुद्दा बना रहा है और बहस से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है।
कुल मिलाकर, राज्यपाल के अभिभाषण पर गंभीर चर्चा की बजाय व्यक्तिगत टिप्पणियों और आरोप-प्रत्यारोप के चलते विधानसभा का पूरा दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया, जिससे जनता से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी।

