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समीक्षा के घेरे में पूर्व गहलोत सरकार की कई लोकप्रिय योजनाएं, फ्री मोबाइल सहित कई स्कीमों पर अधिकारियों से मांगा जवाब

समीक्षा के घेरे में पूर्व गहलोत सरकार की कई लोकप्रिय योजनाएं, फ्री मोबाइल सहित कई स्कीमों पर अधिकारियों से मांगा जवाब

राजस्थान में सत्ता परिवर्तन के बाद पिछली गहलोत सरकार के अंतिम छह माह में लिए गए निर्णयों की गहन समीक्षा के लिए गठित कैबिनेट सब कमेटी की करीब सवा साल लंबी मंथन प्रक्रिया आखिरकार पूरी हो गई। कमेटी ने 450 से अधिक मामलों पर विचार किया, जिनमें से अधिकांश भूमि आवंटन, नीतिगत निर्णय, वित्तीय स्वीकृतियां और टेंडर प्रक्रिया से संबंधित थे।

मुफ्त मोबाइल योजना पर उठे सवाल
समिति ने पिछली सरकार की तीन प्रमुख नीतियों बायोमास नीति, सौर ऊर्जा नीति और मुफ्त मोबाइल वितरण योजना की समीक्षा की। कुछ में सुधार की संस्तुतियां दी गईं, जबकि कुछ के स्थान पर नई नीति की संस्तुति की गई। मुफ्त मोबाइल वितरण योजना के संबंध में कमेटी ने साफ कहा कि योजना का लक्ष्य हासिल नहीं हो पाया और महिलाओं में असंतोष भी देखा गया, खासकर युवतियां योजना से वंचित रहीं।

स्वास्थ्य बीमा योजना की भी समीक्षा की गई
पिछली सरकार द्वारा शुरू की गई मुफ्त स्वास्थ्य बीमा योजना की भी समीक्षा की गई। कमेटी ने अन्य राज्यों के सफल मॉडलों का अध्ययन करने का सुझाव दिया। इसके बाद राज्य सरकार ने इस योजना को आयुष्मान भारत योजना में विलय कर दिया, ताकि बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। समीक्षा में करोड़ों रुपए के नॉन बीएसआर दरों वाले टेंडर भी जांच के दायरे में आए। साथ ही राजस्थान ड्रग्स फार्मास्युटिकल लिमिटेड के तहत 600 करोड़ के मेडिकल लोन के उपयोग को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई। इस मामले में कमेटी ने कहा कि अगर कोई अधिकारी दोषी पाया गया तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।

भूमि आवंटन पर सख्त रुख
समीक्षा के दौरान भूमि आवंटन से जुड़े करीब 300 मामले सामने आए। कई मामलों में डिमांड राशि जमा नहीं करवाई गई, इसके बावजूद कब्जा दे दिया गया। कमेटी ने सिफारिश की कि ऐसे मामलों को विभागीय स्तर पर निरस्त किया जाए।जहां आवंटन पत्र और कब्जा दोनों दे दिया गया, वहां निरस्तीकरण नहीं होगा। लेकिन जिन मामलों में डिमांड राशि के बाद भुगतान नहीं किया गया, वहां गहन समीक्षा के बाद निरस्तीकरण पर निर्णय लिया जाएगा।

नामकरण नीति में बदलाव की सिफारिश
सरकारी स्कूलों और भवनों के नामकरण को लेकर भी नीति में बदलाव की सिफारिश की गई। अब कोई भी समाजसेवी सिर्फ पैसे देकर भवन का नामकरण अपने नाम पर नहीं करवा सकेगा। इसके लिए नई उपसमिति गठित की गई, जो नामकरण प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाएगी।

विभाग करेगा गांधी वाटिका का संचालन
पिछली सरकार के निर्णय के अनुसार गांधी वाटिका का संचालन ट्रस्ट को सौंपा जाना था। लेकिन समिति ने इसकी प्रबंधन संबंधित विभाग द्वारा किए जाने की संस्तुति की, जिसे कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। वहीं, कॉलेज शिक्षा आयुक्त के पद को लेकर भी समिति में चर्चा हुई कि यह आईएएस अधिकारी के अधीन हो या किसी अन्य सेवा के अधीन। हालांकि, इस पर अंतिम निर्णय अभी लंबित है।

खनन आवंटन की भी समीक्षा
भीलवाड़ा और भरतपुर में खनन से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की गई। भूमि आवंटन और लाइसेंस प्रक्रियाओं में नियमों की पालना की स्थिति की जांच की गई। कुछ मामलों में दोबारा जांच की संस्तुति की गई है। समीक्षा समिति के सदस्यों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वे केवल उन्हीं निर्णयों पर संस्तुति करेंगे, जो अनियमित रूप से, राजनीतिक लाभ के लिए या व्यावसायिक लाभ के उद्देश्य से लिए गए हों। इसी आधार पर समीक्षा की गई और संस्तुतियां दी गईं।

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