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डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 24 लाख की ठगी, डॉक्टर समेत दो गिरफ्तार; वीडियो में जाने कजाकिस्तान से पढ़े MBBS डॉक्टर पर गैंग चलाने का आरोप

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 24 लाख की ठगी, डॉक्टर समेत दो गिरफ्तार; वीडियो में जाने कजाकिस्तान से पढ़े MBBS डॉक्टर पर गैंग चलाने का आरोप

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर महिला डॉक्टर से 24 लाख रुपये की ठगी के मामले में अब चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस साइबर फ्रॉड गैंग में खुद एक डॉक्टर की संलिप्तता सामने आई है, जिसने कथित रूप से अपने साथी के साथ मिलकर पूरा नेटवर्क तैयार किया था। मामला Shyam Nagar थाना क्षेत्र का है।पुलिस के अनुसार यह घटना करीब साढ़े पांच महीने पुरानी है, जब महिला डॉक्टर को फोन कर ठगों ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताया था। आरोपियों ने पीड़िता को धमकाया कि उसका बैंक खाता साइबर फ्रॉड में शामिल पाया गया है और उस पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इतना ही नहीं, उन्होंने महिला और उसके परिवार को गिरफ्तार करने की भी धमकी दी थी, जिससे वह मानसिक दबाव में आ गई।

लगातार डर और दबाव के चलते महिला डॉक्टर ने आरोपियों के बताए खातों में करीब 24 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में जब उन्हें ठगी का एहसास हुआ तो उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।जांच के दौरान पुलिस ने सोमवार को इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें एक डॉक्टर भी शामिल है। मंगलवार शाम को पुलिस ने इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि गिरफ्तार आरोपी डॉक्टर ने Kazakhstan से MBBS की पढ़ाई करने के बाद भारत लौटकर अपने एक दोस्त के साथ मिलकर साइबर फ्रॉड गैंग बनाई।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह गैंग लोगों को डराने के लिए “डिजिटल अरेस्ट” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करती थी और खुद को सरकारी जेंसी से जुड़ा बताकर लोगों पर मानसिक दबाव बनाती थी। इसके बाद पीड़ितों से अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए जाते थे।जांच में यह भी सामने आया है कि गैंग बेहद सुनियोजित तरीके से काम कर रही थी और कॉल करने से लेकर पैसे ट्रांसफर कराने तक की पूरी प्रक्रिया अलग-अलग स्तरों पर बंटी हुई थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और ठगी की कुल रकम कितनी हो सकती है।

Rajasthan पुलिस ने कहा है कि साइबर अपराध के इस तरीके में लोगों को मानसिक रूप से डराकर पैसे वसूले जाते हैं, इसलिए आम नागरिकों को किसी भी अनजान कॉल या धमकी पर भरोसा नहीं करना चाहिए और तुरंत पुलिस या साइबर सेल से संपर्क करना चाहिए। फिलहाल दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और पुलिस इस पूरे साइबर फ्रॉड नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है।

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