तेजाजी महाराज की अनोखी कथा: सांप से किया वादा निभाने के लिए आगे कर दी अपनी जीभ, वीडियो में देंखे आज भी आस्था का बड़ा केंद्र है खरनाल
राजस्थान की लोक आस्था में लोकदेवता तेजाजी महाराज का विशेष स्थान है। उन्हें वीरता, गौ-रक्षा और वचन निभाने के लिए जाना जाता है। तेजाजी, तेजल और कंवर तेजा के नाम से प्रसिद्ध तेजाजी महाराज की कथा राजस्थान की लोक परंपराओं में आज भी श्रद्धा के साथ सुनाई जाती है। तेजा दशमी के दिन नागौर के खरनाल स्थित तेजाजी मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। राजस्थान के अलावा देश के अलग-अलग राज्यों से भी लोग यहां आकर लोकदेवता तेजाजी को नमन करते हैं।
लाछा की गायों को छुड़ाने निकले तेजाजी
तेजाजी महाराज की पवित्र कथा के अनुसार एक रात लाछा की गायों को कुछ चोर अपने साथ ले गए। जब लाछा को इस घटना का पता चला तो उन्होंने तेजाजी से मदद मांगी। तेजाजी ने गायों को वापस लाने का संकल्प लिया और चोरों का पीछा किया।
लोककथा के अनुसार गायों को छुड़ाने के दौरान तेजाजी का सामना बड़ी संख्या में डाकुओं से हुआ। कहा जाता है कि उन्होंने करीब 150 डाकुओं से मुकाबला किया और उनके कब्जे से गायों को छुड़ा लिया। हालांकि, इस दौरान एक बछड़ा पीछे रह गया।
तेजाजी को जब पता चला कि एक बछड़ा अभी वहीं रह गया है तो वह उसे वापस लाने के लिए दोबारा लौट पड़े। इसी दौरान उनकी यात्रा में एक ऐसी घटना हुई, जिसे आज भी तेजाजी की कथा का सबसे महत्वपूर्ण प्रसंग माना जाता है।
रास्ते में दिखाई दिया जलता हुआ सांप
कथा के अनुसार जब तेजाजी सुरसुरा पहुंचे तो रास्ते में उन्हें एक सांप दिखाई दिया। वह सांप आग में जल रहा था। तेजाजी ने उसे बचाने का प्रयास किया और आग से बाहर निकालने की कोशिश की।
लोक मान्यता के अनुसार इसी प्रसंग के बाद तेजाजी और नागदेवता के बीच वचन का संबंध जुड़ा। तेजाजी ने सांप से किया हुआ अपना वादा पूरा करने का संकल्प लिया। आगे चलकर यही वचन उनके जीवन की सबसे प्रसिद्ध कथा का हिस्सा बन गया।
वचन निभाने के लिए आगे कर दी जीभ
लोककथा के अनुसार तेजाजी जब अपना वादा पूरा करने के लिए सांप के पास पहुंचे तो उनका पूरा शरीर युद्ध के दौरान घायल हो चुका था। शरीर पर कई घाव होने के कारण सांप ने उनके शरीर के किसी भी ऐसे हिस्से को डसने से इनकार कर दिया, जहां पहले से चोट थी।
तब तेजाजी ने अपना वचन निभाने के लिए अपनी जीभ आगे कर दी। मान्यता है कि सांप ने तेजाजी की जीभ पर डसकर उनका वचन पूरा किया। इसी वजह से तेजाजी महाराज को राजस्थान में वचन के पक्के और महान लोकदेवता के रूप में श्रद्धा से याद किया जाता है।
तेजा दशमी पर खरनाल में उमड़ती है भीड़
तेजाजी की आस्था से जुड़े प्रमुख स्थलों में नागौर का खरनाल विशेष महत्व रखता है। तेजा दशमी के अवसर पर यहां विशेष आयोजन होते हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
तेजाजी की लोककथा में वीरता, गौ-रक्षा और दिए गए वचन को हर परिस्थिति में निभाने का संदेश मिलता है। यही कारण है कि राजस्थान की लोक संस्कृति में तेजाजी महाराज की कथा पीढ़ियों से लोगों की आस्था और विश्वास का हिस्सा बनी हुई है।

