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जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का आखिरी दिन, वीडियो में देंखे संगीत और विचार-विमर्श से भरपूर रहा समापन

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का आखिरी दिन, वीडियो में देंखे संगीत और विचार-विमर्श से भरपूर रहा समापन

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का आज आखिरी दिन था, जो अपने समापन के अवसर पर सांस्कृतिक और बौद्धिक गतिविधियों का केंद्र बना। दिन की शुरुआत मॉर्निंग म्यूजिक से हुई, जिसमें नवाब खान और द मंत्रा बैंड ने शानदार परफॉर्मेंस दी। इस दौरान उपस्थित दर्शकों ने संगीत का आनंद लिया और कलाकारों की प्रस्तुति की सराहना की।

समारोह का एक महत्वपूर्ण आकर्षण युवा पीढ़ी और समाज पर केंद्रित सेशन ‘Gen Z, मिलेनियल्स और मम्मीजी’ था। इस सेशन में जेन Z, मिलेनियल्स और पारंपरिक सामाजिक सोच के बीच के बदलाव और टकराव पर चर्चा की गई। चारबाग में आयोजित इस सेशन में विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए और वर्तमान पीढ़ियों की मानसिकता और सामाजिक परिवर्तनों पर रोशनी डाली।

सेशन में भाग लेने वाले लेखक और समाजविज्ञानी संतोष देसाई ने कहा, “मुझे लगता है कि भारत महाशक्तियों में से एक है। लेकिन इसमें बदलाव का विरोध करने की भी क्षमता है। भारतीय समाज ने खुद को इस तरह से आकार दिया है कि वह प्रगति तो चाहता है, लेकिन परिवर्तन से डरता है।” उनका यह बयान भारतीय समाज में पुराने और नए मूल्य प्रणाली के बीच के तनाव को उजागर करता है।

वहीं, युवा लेखक रिया चोपड़ा ने कहा कि आज की पीढ़ी, विशेषकर मिलेनियल्स, स्थायी रूप से एक ऐसी स्थिति में जी रही है जिसे उन्होंने ‘परमाक्राइसिस’ या स्थायी संकट का नाम दिया। उनका कहना था, “दुनिया लगातार हम पर एक के बाद एक संकट थोप रही है। हमारी पीढ़ी को स्थायी समस्याओं के बीच संतुलन बनाए रखना पड़ता है।” रिया के इस कथन ने युवा वर्ग में व्याप्त तनाव और मानसिक चुनौतियों को सामने रखा।

फेस्टिवल के दौरान, साहित्यिक सत्रों के अलावा विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भी उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया। संगीत, विचार विमर्श और सामाजिक चर्चाओं के माध्यम से यह लिटरेचर फेस्टिवल केवल साहित्यिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह समाज के बदलते दृष्टिकोण और युवा पीढ़ी के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने वाला मंच भी बना।

कार्यक्रम आयोजकों ने बताया कि इस वर्ष का फेस्टिवल पिछले वर्षों की तरह ही सफल रहा। लोगों ने इसके विभिन्न सत्रों, कार्यशालाओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया। आयोजकों का कहना था कि उन्होंने कोशिश की कि हर उम्र और वर्ग के लिए कुछ न कुछ रखा जाए, ताकि युवा और बुजुर्ग दोनों ही सीख और मनोरंजन का अनुभव कर सकें।

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का समापन इस बात का संदेश लेकर हुआ कि साहित्य केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के विचार, संस्कृति और भविष्य की सोच को आकार देने का माध्यम भी है। संगीत, विचार-विमर्श और युवा मुद्दों पर चर्चा ने इसे और अधिक समृद्ध और यादगार बना दिया।

इस प्रकार, फेस्टिवल ने साहित्य, संगीत और समाजिक चिंतन को एक ही मंच पर लाकर दर्शकों को ज्ञान और मनोरंजन का अनूठा अनुभव प्रदान किया।

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