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जयपुर में तेंदुए की बढ़ती मूवमेंट पर वन विभाग सख्त, वीडियो में जाने नया SOP जारी

जयपुर में तेंदुए की बढ़ती मूवमेंट पर वन विभाग सख्त, वीडियो में जाने नया SOP जारी

जयपुर शहर और आसपास की कॉलोनियों में तेंदुए (लेपर्ड) की बढ़ती आवाजाही को देखते हुए राजस्थान वन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। लगातार सामने आ रहे मानव–वन्यजीव संघर्ष के मामलों के बीच विभाग ने एक नया स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी किया है, जिसका उद्देश्य ऐसी घटनाओं को वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से नियंत्रित करना है।हाल के समय में कई इलाकों में तेंदुए के दिखने और कुछ मामलों में हमलों की घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल देखा गया है। इसी स्थिति को देखते हुए वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब किसी भी तेंदुए से जुड़ी कार्रवाई तय प्रोटोकॉल के तहत ही की जाएगी।

नई गाइडलाइन के अनुसार, किसी भी तेंदुए को “आदमखोर” घोषित करने से पहले वैज्ञानिक और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा। इसके लिए घटनाओं की पूरी जांच, विशेषज्ञों की राय और व्यवहार संबंधी विश्लेषण को आधार बनाया जाएगा।वन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्राथमिकता तेंदुए को मारने की नहीं, बल्कि सुरक्षित तरीके से पकड़कर ऐसे स्थान पर स्थानांतरित करने की होगी जहां मानव जीवन को कोई खतरा न हो। यह कदम वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

SOP में यह भी कहा गया है कि जहां तेंदुए का व्यवहार सामान्य हो और वह मानव बस्तियों के लिए सीधा खतरा न बन रहा हो, वहां उसे अनावश्यक रूप से पकड़ने या ट्रांसलोकेट करने से बचा जाएगा। इससे प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र में भी संतुलन बना रहेगा।वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जयपुर के आसपास तेजी से हो रहे शहरीकरण और जंगलों के सिकुड़ने के कारण वन्यजीवों का रिहायशी इलाकों की ओर रुख बढ़ा है। इसी वजह से मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव की घटनाएं सामने आ रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की गाइडलाइन से न केवल तेंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि भविष्य में इंसानों और वन्यजीवों के बीच होने वाले संघर्षों को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।स्थानीय प्रशासन और वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि तेंदुए दिखने की स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत संबंधित विभाग को सूचना दें और स्वयं किसी भी तरह की कार्रवाई करने से बचें। कुल मिलाकर, नया SOP जयपुर और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते मानव–वन्यजीव संघर्ष को वैज्ञानिक और नियंत्रित तरीके से संभालने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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